जर्मनी और बेल्जियम में नदियां उफान पर, अब तक 70 लोगों की मौत

जर्मनी और बेल्जियम में रिकॉर्ड बारिश के बाद नदियां उफ़ान पर हैं और बाढ़ का कहर जारी है. नदियों के किनारे टूट गए हैं. बारिश का कहर बाढ़ बनकर बह रहा है जिससे अब तक कम से कम 70 लोगों की मौत हो चुकी है और तमाम लोग लापता हैं.
ज़्यादातर मौतें जर्मनी में हुई हैं लेकिन बेल्जियम में भी कम से कम 11 लोगों की मौत हुई है. इसके अलावा बहुत से लोगों के ग़ायब होने की भी ख़बर है.
बाढ़ का सबसे ज़्यादा असर जर्मनी के राइनलैंड-पलाटिनेट और उत्तरी राइन-वेस्टफेलिया प्रांतों में है. इसके साथ ही नीदरलैंड मे भी स्थिति बेहद गंभीर है. शुक्रवार को पूरे क्षेत्र में और भारी बारिश का अनुमान है. स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि यह आपदा जलवायु परिवर्तन का परिणाम है.
नॉर्थ राइन-वेस्टफ़ेलिया के प्रीमियर आर्मिन लैसेट ने बारिश-बाढ़ से प्रभावित एक इलाक़े के दौरे के दौरान ग्लोबल वॉर्मिंग को इसके लिए प्रमुख कारण बताया. उन्होंने कहा, “हमें आगे भी इस तरह की घटनाओं का बार-बार सामना करना पड़ेगा और इसका मतलब है कि हमें जलवायु संरक्षण के उपायों को तेज़ करने की ज़रूरत है क्योंकि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव किसी एक राज्य तक ही सीमित नहीं है.”
विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन से कारण ऐसी प्राकृतिक आपदाओं के अधिक आने की पूरी आशंका है लेकिन किसी एक घटना को ग्लोबल वॉर्मिंग के परिणाम से जोड़कर देखना भी ठीक नहीं है.
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ एक बैठक के सिलसिले में अमेरिका पहुंचीं जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल ने कहा है कि उन्हें इस आपदा से “गहरा धक्का लगा” है. एंगेला मर्केल ने अपने एक संबोधन में जर्मनी में बाढ़ की स्थिति को तबाही बताया. उन्होंने बाढ़ के कारण अपनी जान गंवाने वालों के प्रति भी संवेदना ज़ाहिर की और कहा कि लोगों की मौत दुखी करने वाली है.
उन्होंने कहा, “मेरी संवेदनाए आपके साथ हैं और आप इस बात पर भरोसा कर सकते हैं कि हमारी सरकार हर तरह से लोगों के जीवन की रक्षा करने, ख़तरे को कम करने और इस संकट को दूर करने के लिए सबकुछ करेगी.” जर्मनी में प्रभावित इलाक़ों में बाढ़ में फंसे हुए लोगों की मदद के लिए पुलिस, हेलीकॉप्टर और सैकड़ों सैनिकों को तैनात किया गया है.
जर्मनी के पश्चिम इलाक़े में स्कूलों को बंद कर दिया गया है. इस इलाक़े में परिवहन व्यवस्था को बुरी तरह से नुकसान पहुंचा है और संपर्क बाधित हुआ है. जर्मन ब्रॉडकास्टर एसडब्ल्यूआर के अनुसार, पहाड़ी एफ़ेल क्षेत्र के शुड बी अडेनौ ज़िले में लगभग 25 घर ऐसे हैं जो कभी भी ढह सकते हैं. इस इलाक़े में आपातकाल स्थिति की घोषणा कर दी गई है.
ऐसा कहा जा रहा है कि कुछ इलाक़े तो इस क़दर प्रभावित हुए हैं और कट गए हैं कि अब वहां नाव से पहुंच पाना भी मुश्किल है. इलाक़े के लोगों ने न्यूज़ एजेंसी एएफ़पी से कहा कि इस आपदा से वो बुरी तरह आतंकित हैं. मायेन निवासी 65 साल के एनमरी मुलर ने कहा, “किसी को भी इसकी उम्मीद नहीं थी. आख़िर ये इतनी बारिश आयी कहां से? पानी की आवाज़ इतनी तेज़ थी कि लग रही थी कि यह दरवाज़ा ही तोड़ देगा.”
36 साल की मेयेर कहती हैं कि उन्होंने अपने अब तक के पूरे जीवन में ऐसा कुछ कभी नहीं देखा था. वो कहती हैं, “मेरे ससुर लगभग 80 साल के हैं. उन्होंने भी यही बताया कि उनके अस्सी साल के जीवन में उन्होंने ऐसा मंज़र कभी नहीं देखा था.” बेल्जियम से बाढ़ के जो वीडियो और तस्वीरें सामने आ रही हैं उन पर यक़ीन करना मुश्किल हो रहा है.
सड़कों पर गाड़ियां ऐसे बह रही हैं जैसे वो काग़ज की हों. पेड़ गिरे पड़े हैं. ब्रसेल्स और एंटवर्प के बाद बेल्जियम के तीसरे सबसे बड़े शहर लीज को खाली करने का आदेश जारी किया गया है. स्थानीय अधिकारियों ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि जो लोग दूसरी जगहों पर जाने में असमर्थ हैं वे अपने घरों के सबसे ऊंचे माले पर या छतों पर चले जाएं.
शहर से होकर बहने वाली मीयूज़ नदी पहले से ही उफ़ान पर थी और अब आशंका जताई जा रही है कि इसका स्तर क़रीब 1.5 मीटर और बढ़ गया है. अधिकारियों ने एक बांध पर बने पुल के गिरने को लेकर भी चिंता ज़ाहिर की है और लोगों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में एक-दूसरे की मदद करें. बेल्जियम के पेपिनस्टर शहर से गुरुवार को एक बड़े ट्रक से लोगों को निकाला जा रहा था लेकिन हालात इस क़दर ख़राब हो गए कि लोगों को बाहर निकालने के काम को फिलहाल के लिए रोक दिया गया है.
नीदरलैंड्स से किसी की मौत की ख़बर नहीं है लेकिन नदी के किनारे बसे कस्बों और गांवों में हज़ारों लोगों से अपील की गई है कि वे अपने घरों को जितनी जल्दी हो सके छोड़कर चले जाएं.
-एजेंसियां