शेर बहादुर देउबा होंगे नेपाल के नए प्रधानमंत्री

काठमांडू। सुप्रीम कोर्ट ऑफ नेपाल ने आज देश के प्रधान मंत्री के रूप में नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा (Sher Bahadur Deuba) की नियुक्ति पर एक आदेश पारित किया। दो दिनों के भीतर SC ने प्रतिनिधि सभा को भी बहाल कर द‍िया जाएगा।

समाचार एजेंसी के अनुसार नेपाल की शीर्ष अदालत ने लगभग पांच महीनों में दूसरी बार भंग प्रतिनिधि सभा को भी बहाल कर दिया। HoR भंग करने के खिलाफ कुल 30 रिट याचिकाएं दायर की गई हैं।

नेपाली कांग्रेस (NC) के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा सहित HoR के 146 सांसदों ने रिट याचिका दायर कर प्रतिनिधि सभा की बहाली और देउबा को नेपाल का प्रधान मंत्री नियुक्त करने की मांग की है।

राष्ट्र के सर्वोच्च निकाय के साथ दायर याचिकाओं पर मैराथन चर्चा 5 जुलाई को खत्म हुई। इसके बाद सुनवाई की अगली तारीख 12 जुलाई तय की गई और इसी दिन कोर्ट ने इन याचिकाओं पर फैसला सुनाने के लिए भी कहा।

भले ओली के इस कदम के खिलाफ कई रिट याचिकाएं दायर की गई थीं, लेकिन अदालत ने पहले मुख्य विपक्षी नेता शेर बहादुर देउबा द्वारा दायर याचिका पर फैसला सुनाने का फैसला किया और सुनवाई शुरू की।

अदालत ने याचिकाकर्ताओं और सरकार की ओर से दलील देने के बाद सोमवार को इस मुद्दे पर केंद्रीय समिति और नेपाल बार एसोसिएशन के सुप्रीम कोर्ट चैप्टर द्वारा भेजे गए चार एमिसी क्यूरी पर भी सुनवाई की। चार वरिष्ठ वकीलों में से दो ने तर्क दिया कि सदन को बहाल किया जाना चाहिए जबकि दो ने कहा कि ओली का कदम सही था।

दरअसल ओली के नेतृत्व वाली सरकार ने 22 मई को सदन को भंग करने की घोषणा की थी। सरकार ने तब ये तर्क दिया किसदन ऐसे प्रधान मंत्री का चुनाव नहीं कर सका जो सदन में बहुमत हासिल करे और उसे बहुमत का समर्थन भी न दे।

वहीं सुनवाई की तारीख नजदीक आने के साथ अपना विरोध तेज करने वाले सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने निचले सदन की बहाली तक अपना विरोध जारी रखने का संकल्प लिया है। नेपाल संघीय गणराज्य के पहले प्रधान मंत्री होने के नाते, केपी शर्मा ओली ने दूसरी बार सदन को भंग करने का प्रयास किया था।

दूसरी बार सदन भंग करने की रिट याचिकाओं का नेतृत्व करते हुए मुख्य न्यायाधीश चोलेंद्र जेबी राणा ने रिट पर सुनवाई के लिए उनके नेतृत्व में पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ का गठन किया। बेंच के दूसरे न्यायाधीशों में दीपक कुमार कार्की, मीरा खडका, ईश्वर प्रसाद खातीवाड़ा और डॉ आनंद मोहन भट्टाराई शामिल हैं।
-एजेंसी