पुलिस भर्ती घोटाले का आरोप भी झेला है यूपी के नए DGP मुकुल गोयल ने

यूपी के नए DGP के लिए मुकुल गोयल के नाम पर मुहर लग गई है। मुकुल गोयल के लिए सबसे बड़ी चुनौती वर्ष 2022 की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव होंगे। राष्ट्रपति के वीरता पदक से सम्मानित मुकुल अगर अपने रिटायरमेंट तक डीजीपी रहे तो इस पद पर इतने लंबे समय तक तैनात होने का यह यूपी में रेकॉर्ड होगा। मुकुल गोयल फरवरी 2024 में रिटायर होंगे।
भारतीय पुलिस सेवा में आने के बाद मुकुल गोयल ने नैनीताल में एएसपी के पद से नौकरी की शुरुआत की थी। इसके बाद उनको बरेली का एसपी सिटी बनाया गया था। मुकुल गोयल अमरोहा, जालौन, मैनपुरी, आजमगढ़, हाथरस, गोरखपुर, वाराणसी, सहारनपुर और मेरठ में पुलिस कप्तान के पद पर रहे। डीआईजी के पद पर प्रमोट होने के बाद वह कानपुर, आगरा, बरेली के डीआईजी रेंज रहे और बाद में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर आईटीबीपी में चले गए।
सपा सरकार में लंबा कार्यकाल नहीं रहा
प्रतिनियुक्ति से लौटने पर मुकुल गोयल को बरेली जोन का एडीजी बनाया गया। उसके बाद उनको एडीजी रेलवे पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। सपा सरकार में उनको एडीजी कानून-व्यवस्था बनाया गया हालांकि यह कार्यकाल लंबा नहीं रहा और उनको हटाने के बाद ईओडब्ल्यू, रेलवे और सीबीसीआईडी में तैनाती दी गई। 2016 में उनका चयन फिर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए हुआ, इसके बाद वह बीएसएफ में आईजी बनाए और वहीं पर एडीजी के पद पर प्रोन्नत हो गए।
मुकुल को वर्ष 2003 में राष्ट्रपति का वीरता पदक मिला था। इसी वर्ष उन्हें दीर्घ और सराहनीय सेवाओं के लिए पुलिस पदक से भी सम्मानित किया गया था। वर्ष 2012 में उन्हें विशिष्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रपति का पुलिस पदक मिला। वर्ष 2020 में उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री के अति उत्कृष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया।
भर्ती घोटाले में हुई थी एफआईआर
2004 से 2006 में सपा सरकार के कार्यकाल में हुए पुलिस भर्ती घोटाले में भर्ती की प्रक्रिया में शामिल रहे मुकुल गोयल के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज हुई थी। हालांकि एंटी करप्शन ब्यूरो की जांच में उन पर लगे आरोप सही नहीं पाए गए थे और उन्हें क्लीन चिट दे दी गई थी। उनसे जुड़े मुकदमे में एसीबी ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी।
-एजेंसियां