मैशेबल ने 30 June 2010 को शुरू क‍िया था विश्व सोशल मीडिया डे

आज हम आपसे पारस मणि या नए युग के अलाउद्दीन चिराग की बात कर रहे हैं |जिसे ना तो घिसना पड़ता है ना ही रगड़ना पड़ता है |बस उंगलियों से टच करते ही प्रभु की कृपा से पारस मणि को और पारस बनाने का प्रयास भी इसी के माध्यम से जागरूक नागरिकों और पत्रकारों द्वारा आम जनता के समक्ष सही व अन्य छुपे हुए तथ्यों को उजागर भी कर देता है |इसे हम सोशल मीडिया कहते हैं |आज इसी सोशल मीडिया का दिवस है| आइए जानते हैं इस सोशल मीडिया ने दुनिया भर के तमाम अविष्कारों को कैसे पीछा छोड़ दिया और और तमाम उन चीजों से नाता जुड़वा दिया जो मनुष्य की परिकल्पना में भी संभव नहीं था|
धीरुभाई अंबानी का रिलायंस मोबाइल लाने का जो स्लोगन था कर लो दुनिया मुट्ठी में वह इसी सोशल मीडिया द्वारा आज मूर्त रूप ले लिया है |आज सोशल मीडिया की अनेक प्रकारों मैं हजारों किलोमीटर दूर बैठे लोगों से ना केबल संबंधों को संचित कराए रखा है बल्कि व्यापार ,परिवार, जानकारी,विज्ञान सबका लाभ दिलाया है |आज आपको केवल एक स्मार्टफोन और नेट कनेक्शन चाहिए वो फिर क्या है आप स्वप्न में जिस प्रकार स्वर्ग की सैर करते हैं उसी प्रकार आपके मन मस्तिष्क में उठे हुए तमाम सवालों के जवाब आप को मिलते हैं |वह आपके सभी सपने साकार करने में यह सोशल मीडिया काफी मददगार साबित होता है ।आपको काफी हद तक स्वतंत्र भी बनाता है |
सोशल मीडिया डे की शुरुआत सोशल मीडिया कंपनी मैशेबल (Mashable) ने 30 जून 2010 को विश्व सोशल मीडिया डे शुरुआत की ।आज के समय में सोशल मीडिया की ताकत से कोई भी इनकार नहीं कर सकता। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डालते ही झूमरी तल्लईया से अमेरिका तक मतलब दुनिया के किसी कोने में आपका दोस्तों, रिलेशन वाला हो ,फेन हो ,ग्राहक हो या प्रेमी तक पलक झपकते चीज़ , भावना सलाह पहुंच जाती है। सोशल मीडिया इतना ज्यादा प्रभावी हो चुकी है कि इसके जरिए लाखों लोगों तक आसानी से पहुंच बनाई जा सकती है।
निसंदेह सोशल मीडिया ने हमारे जीवन को बदल दिया है। आज इसी के चलते हम खुद को अपनों के बेहद करीब पाते हैं।सोशल मीडिया के नाम से भी पता चलता है समाज में समाचार भेजने व पाने का स्थान या माध्यम कहते है ।सोशल मीडिया में वीडियोकॉल,मीटिंग ,इंस्टाग्राम ,वहत्सप , ट्वीट्रर, फ़ेसबुक ,स्नैप चेट ,लिंक्डइन, यू टूब ब्लॉगिंग या टिक टोक ज़ूम ऐप आदि सभी चीजें हमें एक दूसरे से जुड़ाव महसूस कराने के साथ मनोरंजन भी देता है।हम दूर से दूर बैठे लोगों के साथ इंटरेक्ट कर सकते हैं। अपना ऑपीनियन रख सकते हैं, इसलिए आज यह हमारे रोजमर्रा की जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन गया है।

आज हैशटैग का अर्थ है कि दो से तीन शब्दों में किसी टॉपिक को बयां कर देना जैसे #ताज #कोरोना

आज कोरोना वाइरस में लाकडाउन के चलते ये वो ही सोशल मीडिया है जो कल तक बेकारों का साथी था वो आज पूरे विश्व का सबसे अच्छा साथी बन गया क्या गाँव ,क्या शहर क्या बच्चे क्या बूढ़े सब के सब सोशल मीडिया में उलझे पड़े है| किसी को ज़िंदगी लाक्डाउन हो गयी इसने अहसास नही होने दिया।इसने अकेलापन भी दूर किया| खाना बनाना सिखा दिया टिक
टोक से मनोरंजन कराया विडीओ चेट से अपनो का हाल लिया ,बच्चों ने पढ़ाई की, सरकारी ,व्यापारी व समाज सेवियों ने ना केवल अपना काम किया और देश को आर्थिक हानि होने से भी बचाया साथ ही तमाम एप ज़ूम ,गूगल मीटिंग अनेक इस तरह के एप से मीटिंग की और लाक्डाउन का पालन हुआ |भैया जी की शादी तक हो गयी।भाई कवियों ने सब से ज़्यादा मोज ली अपनी कलम के हुनर को व गला भी ख़ूब साफ़ ही नही लोगों का मनोरंजन किया । प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का भी खबरों का सूत्र रहा सोशल मीडिया। कोरोना के समय हमें किस क्षेत्र में जाना है ,किस में नही ,कौन से क्षेत्र रेड जॉन है , क्या बचाव करने है क्या नही सब्ज़ी कब कहा मिलेगी तो दूध किस किस लोकेशन पर जीवन जीने हर ज़रूरत का पदार्थ का पता व समय दिलाता था |समाज सेवियों ने ग़रीब व भूखे तक रोटी पहुँचाई ,प्रशासन की प्लानिंग से लेकर कोरोना पीड़ित मीडिया कर्मी के साथ अन्याय ,हर पल पल की ख़बर कभी धड़कन ऊपर कभी नीचे यह था |सोशल मीडिया का रोल जिसने आम आदमी को हताश नही होने दिया साथ ही लड़ना सिखाया आज आम आदमी की दिल में घंटे घड़ियाल नही कोरोना योद्धा के लिए जगह हे सम्मान है वो सोशल मीडिया में दर्ज रहेगा |
रोटी कपड़ा और मकान के साथ चौथी आवश्यकता अपनी वाहन की मानी जा रही थी परंतु सोशल मीडिया और स्मार्टफोन में वाहन की आवश्यकता को पीछे छोड़ के चौथी आवश्यकता का रूप सोशल मीडिया ने ले लिया है |हाल में ही 1 जून 2021 को प्रदेश के मुखिया सर्व श्री योगी आदित्यनाथ जी ने लॉकडाउन हटाया तब शाह मार्केट जो स्मार्टफोन ऑर गैजेट्स का बड़ा मार्केट है वहां पर भीड का आलम देखते बनता था और इस बात को सत्यापित करता था सोशल मीडिया आम आदमी की जिंदगी में बहुत अहमियत रखता हैं|
आज सरकारी सूचना देनी हो तो पहले एक एक ही ही माध्यम था चिट्ठी लिखना या ग्राम देना लेकिन अब ऊपर बताए हुए अनेक साधनों के माध्यम से सरकार तक अपनी बात आप सीधे पहुंचा सकती हैं| यह बात व्हाट्सएप ,फेसबुक, सरकार की ट्विटर अकाउंट पर या अनेक अन्य साधनों के माध्यम से आप पहुंचा सकते हैं
वरचुआल लाइफ़ जीना साथ समझदार लोगों ने इसका समझ दारी से उपयोग करके ना केवल प्रसिद्धि के साथ पैसा भी कमाया समाज सेवा में सोशल मीडिया के योगदान को कोई नही नकार सकता ।आपको यह भी जानकर आश्चर्य होगा इसका भारतीय दुनिया में सबसे ज़्यादा उपभोक्ता है ।
जब हम बात सोशल मीडिया के लाभ की बात कर रहे हैं तो ऐसा नही है हानि एक ( अभिशाप )ना हो । जैसे सिक्के के दो पहलू होते हैं हेड एंड टेल |उसी प्रकार से सोशल मीडिया के अगर आनंद व फायदे हैं तो इसके कुछ नुकसान भी है जिसके परिणाम भी बहुत घातक है और इतने घातक हैं कि वह कई दफे तो हिंसा व परिवार विघटन का रूप ले लेते हैं|

आज सोशल मीडिया के माध्यम से कोई भी खबर इतनी जल्दी से फैलती है जिससे आदमी तनाव में आ जाता बिना सोचे समझे कदम उठा लेता।इस सोशल मीडिया का फायदा देश के गद्दार या समाज के दुश्मनों द्वारा बहुत खूबी से इस्तेमाल किया जाता है| दूसरा इसका दुष्परिणाम और है जब हम आगरा से अमेरिका में संबंध स्थापित कर रहे होते हैं तो एसे मै अपने पड़ोस ,आसपास के लोग उनसे हम इतनी दूर हो जाते हैं कि उनके चेहरे और चाचा , भाई और बेटा जैसे शब्द सुनने के लिए यह कान तरस जाते हैं |ऐसे में सोशल मीडिया रिश्तो को मिटाने के लिए रबड़ का काम कर रही है |इसका एक दुष्परिणाम और समाज को देखने को मिल रहा है की घर परिवार में 4 सदस्य होते हैं चारों सोशल मीडिया पर लगे रहते हैं तो आपसे प्यार तो बहुत दूर की बात है संबंधों में इतनी खटास आ रही है |

2006 में फ़ेस बुक आने के पारिवारिक रिलेशन में विघटन के केस बढ़े है |आज 40 परसेंट पारिवारिक रिश्ते की नींव इस सोशल मीडिया के माध्यम से ही गड़बड़ा रही है |यह आंकड़े परिवार परामर्श केंद्र से भी अनुमोदित किए जा सकते हैं दुष्परिणाम का यह रूप भी भयंकर हैं बच्चे अपनी उम्र से पहले ना केवल परिपक्व हो है बल्कि और सोशल मीडिया के माध्यम से उन चीजों से रूबरू होते हैं जो कि सरकार द्वारा निश्चित आयु से बाद वैध होता है|
आज के आधुनिक युग मे सोशल मीडिया का इस्तेमाल अमृत के सामान करना है तभी नवनिर्माण होगा।
– राजीव गुप्ता जनस्नेही कलम से
लोक स्वर, आगरा