यूपी के 21 जिलों में भाजपा के जिला पंचायत अध्यक्ष बनना तय

यूपी में जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में सहारनपुर, शाहजहांपुर, बहराइच और पीलीभीत में भी भाजपा ने प्रतिद्वंदी उम्मीदवारों का नामांकन वापस लेने में सफलता हासिल की है। इन जिलों में भाजपा प्रत्याशियों का निर्विरोध निर्वाचित होना तय हो गया है। कई अन्य और जिलों में भी भाजपा इसी तरह का प्रयास कर रही है।

इस तरह भाजपा के 21 जिलों में निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष तय हो गए हैं। बता दें कि प्रत्याशियों के नामांकन की प्रक्रिया दोपहर तीन बजे तक चलेगी। इसके बाद चुनाव की तस्वीर साफ हो जाएगी। बता दें कि 26 जून को हुए नामांकन के बाद ही तय हो गया था कि भाजपा 17 जिलों में जिला पंचायत अध्यक्षों का चुनाव निर्विरोध जीतेगी।

इन भाजपा प्रत्याशियों का निर्वाचन तय
बुलंदशहर से डॉ. अंतुल तेवतिया, मुरादाबाद से डॉ. शेफाली सिंह, मेरठ से गौरव चौधरी, गाजियाबाद से ममता त्यागी, बलरामपुर से आरती तिवारी, गौतमबुद्ध नगर से अमित चौधरी, मऊ से मनोज राय, गोरखपुर से साधना सिंह, चित्रकूट से अशोक जाटव, झांसी से पवन कुमार गौतम, बांदा से सुनील पटेल, गोंडा से घनश्याम मिश्र, श्रावस्ती से दद्दन मिश्रा, आगरा से मंजू भदौरिया और ललितपुर से कैलाश निरंजन के खिलाफ किसी ने भी नामांकन दाखिल नहीं किया, जिससे इनका निर्विरोध चुना जाना तय है।
पश्चिमी यूपी में भी भाजपा ने की हार की भरपाई
भाजपा जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में पश्चिमी यूपी में मिली शिकस्त से हुए राजनीतिक नुकसान की भरपाई जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव से कर ली है। पश्चिम क्षेत्र के 15 में से 6 जिलों में भाजपा के उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन तय है। उधर, कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र में भी 14 जिलों में से चार जिलों में भाजपा के उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचित होना तय है।

दरअसल, कृषि कानूनों के विरोध में हुए किसान आंदोलन का सबसे ज्यादा असर पश्चिम क्षेत्र में रहा। यही नहीं, वहां सपा और रालोद का गठजोड़ भी काम किया। नतीजतन जिला पंचायत सदस्य के चुनावों में भाजपा को अधिकांश जिलों में करारी शिकस्त मिली थी। इससे विरोधी दलों ने पश्चिम क्षेत्र के जिलों में भाजपा के खिलाफ हवा बनाना शुरू किया।

जानकारों का मानना है कि सरकार व संगठन के रणनीतिकारों ने विपक्ष की चाल को नाकाम करने के लिए सर्वाधिक जोर पश्चिम में ही लगाया। भाजपा पश्चिम के अधिकांश जिलों में जिला पंचायत अध्यक्ष और क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष पद पर काबिज होकर संदेश देना चाहती है कि बाजी उसके ही हाथ है।
-एजेंसियां