Central Vista मामले में हस्‍तक्षेप से सुप्रीम कोर्ट का इंकार

नई दिल्‍ली। देश इस वक्त कोरोना महामारी जैसी भयानक स्थिति का सामना कर रहा है, ऐसे में नई दिल्ली में केंद्र सरकार के द्वारा Central Vista प्रोजेक्ट जारी है। इस मुद्दे पर देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इस बात के मद्देनजर सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के मामले में दखल देने से इंकार कर दिया कि यह मामला पहले से ही दिल्ली हाईकोर्ट में है।
न्यायमूर्ति विनीत सरन और दिनेश माहेश्वरी की पीठ ने याचिकाकर्ता को दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष इस मामले की जल्द सुनवाई के लिए स्वतंत्रता प्रदान की। पीठ ने हाईकोर्ट से भी कहा कि वह जल्द सुनवाई के लिए याचिका पर विचार करे। केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रस्तुत किया कि हाईकोर्ट ने मामले को 17 मई को सुनवाई के लिए निर्धारित कर रखा है।
याचिकाकतार्ओं का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने दलील देते हुए कहा, हम एक मानवीय स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहे हैं। अगर इस परियोजना को चार से छह सप्ताह तक टाल दिया जाए तो कुछ नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि आईपीएल पहले ही निलंबित हो चुका है और हम एक अभूतपूर्व कोविड संकट का सामना कर रहे हैं। मेहता ने कहा कि एक जनहित याचिका के माध्यम से अदालत में आने वाले याचिकाकर्ता और हाईकोर्ट के स्थगन आदेश के खिलाफ विशेष अवकाश याचिका (एसएलपी) दाखिल करना गंभीर संदेह पैदा करता है।
मेहता ने कहा कि स्थगन के खिलाफ अपील गलत मिसाल कायम करेगी। लूथरा ने पीठ के समक्ष दलील दी कि जब मानव जीवन का संबंध है, तो सरकार को रक्षा करनी होगी। उन्होंने कहा कि अप्रैल से मई तक दिल्ली में कोविड की पॉजिटिविटी रेट बढ़ी है और कोविड के कारण मौतों की संख्या में भी वृद्धि हुई है।
लूथरा ने कहा, इस मामले पर विचार करने की जरूरत है। हाईकोर्ट के समक्ष हमने प्रस्तुत किया है कि हम 3.5 से 4 किलोमीटर के विस्तार से चिंतित हैं। हम एक ऐसे स्तर पर हैं, जहां स्वास्थ्य व्यवस्था टूट गई है, लोग मर रहे हैं। पीठ ने जवाब दिया कि वह स्थिति से अवगत है, लेकिन अदालत मौतों के बारे में टिप्पणी नहीं कर सकती क्योंकि इसे अन्यथा लिया जा सकता है।
लूथरा ने कहा कि 8 साइटें हैं, जो निमार्णाधीन हैं और हम सभी को लेकर चिंतित नहीं हैं, बल्कि हम तो केवल राजपथ, सेंट्रल विस्टा विस्तार और गार्डन से संबंधित साइट्स को लेकर चिंतित हैं। लूथरा ने दलील पेश करते हुए कहा, निर्माण एक आवश्यक गतिविधि कैसे हो सकती है? एक स्वास्थ्य आपातकाल में, हम श्रमिकों और उनके परिवारों के जीवन को खतरे में नहीं डाल सकते हैं और न ही स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर अधिक दबाव डाल सकते हैं।
मामले में विस्तृत सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने कहा कि चूंकि मामला हाईकोर्ट के समक्ष लंबित है और अपील स्थगन के आदेश के खिलाफ है, इसलिए मामले की मेरिट्स के आधार पर वह इसमें हस्तक्षेप करने की इच्छुक नहीं है। वर्तमान मामले में याचिकाकतार्ओं ने शीर्ष अदालत से राष्ट्रीय राजधानी में कोविड-19 स्थिति और निर्माण कार्य के कारण संक्रमण फैलने की संभावना से उत्पन्न खतरे के कारण निर्माण को रोकने का आग्रह किया है।
अधिवक्ता नितिन सलूजा के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि न केवल चल रही निर्माण गतिविधि में सुपर स्प्रेडर (तेजी से संक्रमण फैलना) की संभावना है, बल्कि यह स्पष्ट रूप से दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा पारित आदेशों का उल्लंघन भी है। मामले के संबंध में शुरूआत में याचिकाकतार्ओं ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था, जिसने 17 मई तक मामले को बिना किसी आदेश के स्थगित कर दिया था।
बता दें कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत नया संसद भवन, प्रधानमंत्री और उप राष्ट्रपति के आवास के अलावा कई सरकारी इमारतें राजपथ और इंडिया गेट के आसपास बन रही हैं। कोविड-19 महामारी के इस बुरे दौर के बीच सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को लेकर विपक्षी दल भी हमलावर बने हुए हैं।
-एजेंसियां