हरियाणा: 4 महीने में चुनाव, हाईकोर्ट की चेतावनी के बावजूद खट्टर सरकार ने किया गुरमीत राम रहीम को परोल देने का समर्थन

25 मई 2017, दो साध्वियों के साथ रेप करने का दोष सिद्ध होने के बाद सीबीआई अदालत ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख सिंह इंसा को 20 साल उम्रकैद की सजा सुनाई। धर्म के चोला ओढ़ घिनौना अपराध करने वाला सलाखों के पीछे गया लेकिन बाहर लाखों अनुयायियों की आस्था में फिर भी कमी नहीं आई। दंगा फसाद हुआ और करीब 30 लोग मारे गए। सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा सो अलग। अब राम रहीम के प्रति  की मनोहर लाल खट्टर सरकार ने कुछ नरमी दिखाई है।
 के जेल मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने को परोल पर बाहर भेजने की वकालत की है। गुरमीत राम रहीम फिलहाल रोहतक की सुनारिया जेल में बंद है। खट्टर सरकार में मंत्री अनिल विज ने भी राम रहीम का जेल में आचरण अच्छा बताते हुए उसे परोल दिए जाने का समर्थन किया है। विपक्षी और पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के मुताबिक, राम रहीम को परोल देना, न देना सरकार की मर्जी है। सरकार को तय करना है कि अर्जी पर गौर करे या न करें।
वहीं, राम रहीम को लेकर खट्टर सरकार की नजरें इनायत को सियासत से जोड़कर देखा जा रहा है। सूबे में करीब 4 महीने में विधानसभा के चुनाव हैं। आम तौर पर यह धारणा है कि हरियाणा में डेरा सच्चा सौदा संस्था का खासा दबदबा है। राम रहीम को रेप के मामले सजा मिलने के बाद भी उसके लाखों की संख्या में अनुयायी हैं। वे अनुयायी वोटर भी हैं। सियासत के सवाल पर सूबे के जेल मंत्री पंवार का कहना है, ”हर गुनहगार को सजा के एक साल बाद परोल के लिए अर्जी देने का अधिकार है। उन्होंने अर्जी दी जिसे हमने सिरसा प्रशासन के पास भेज दिया है। अगर राजनीति का लाभ उठाने का हमारा इरादा होता तो हम उन्हें लोकसभा चुनाव से पहले छोड़ते। सरकार का ऐसा कोई इरादा नहीं है।”
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि हरियाणा में 2014 में भारतीय जनता पार्टी की खट्टर सरकार बनाने में डेरा सच्चा सौदा संगठन का खासा योगदान था। वहीं, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकार को राम रहीम को परोल दिए जाने को लेकर इसी साल मई में चेताया था। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस कुलदीप सिंह ने राम रहीम की बेटी द्वारा दी गई अर्जी पर कहा था कि “मैं गुरमीत राम रहीम सिंह के खिलाफ गंभीर आरोपों पर विचार करने के बाद देख रहा हूं कि उन्हें परोल पर भेजने पर और फिर से उन्हें गिरफ्तार करने पर कानून-व्यवस्था की समस्या हो सकती है। उन्हें परोल दिए जाने का कोई आधार नहीं है।”
एक और बात सामने आ रही है कि राम रहीम ने अपने खेतों में खेती करने के लिए 42 दिनों की परोल मांगी है लेकिन जांच अधिकारियों ने अपनी पड़ताल में पाया कि राम रहीम के पास खेती है ही नहीं। जो भी जमीन है वह डेरा सच्चा सौदा संगठन की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक हरियाणा के गृह सचिव ने गुरमीत राम रहीम की परोल की अर्जी पर विचार किए जाने की बात कही है। 
बता दें कि साध्वियों से रेप के अलावा पत्रकार छत्रपति हत्याकांड मामलों में भी गुरमीत राम रहीम सजा काट रहे हैं। 
90 सीटों वाली विधानसभा के लिए हरियाणा में अक्टूबर महीने में चुनाव होने हैं। चुनाव की तारीखें अभी घोषित नहीं की गई हैं। वर्तमान सरकार का कार्यकाल 2 नवंबर 2019 को खत्म होगा। हरियाणा में मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), भारतीय राष्ट्रीय लोकदल (आईएनएलडी) और  के बीच है। आईएनएलडी के ओम प्रकाश चौटाला और  के भूपिंदर सिंह हुड्डा सूबे के सीएम रह चुके हैं।
हाल में 21 जून को मनाए गए योग दिवस में भी हरियाणा को लेकर बीजेपी का खासा जोर रहा था। गृहमंत्री अमित शाह हरियाणा के रोहतक में योग करने पहुंचे थे। विपक्ष की मजबूरी यह है कि राम रहीम के परोल का विरोध करने से इसे वह वोटरों को नाराज कर सकती है।