भगवान श्रीकृष्ण का इकलौता मंदिर…जहां राधा नहीं मीराबाई के साथ होती है मुरलीधर की पूजा

Lucknow: श्रीकृष्ण के साथ हमेशा देवी राधा की मूर्ति होती है और देवी राधा के साथ ही श्रीकृष्ण का नाम लिया जाता है। लेकिन राजस्थान में एक ऐसा मंदिर (Jagat Shiromani Temple) है जिसमें देवी राधा नहीं बल्कि कान्हा के साथ उनकी भक्तिनी मीराबाई हैं और मंदिर में कान्हा के साथ ही मीराबाई की भी पूजा होती है।

यह मंदिर है राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित है और इस मंदिर का नाम है जगत शिरोमणि मंदिर (Jagat Shiromani Temple)। आमेर का यह मंदिर यहां का सबसे लोकप्रिय और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। इस मंदिर का निर्माण महाराजा मानसिंह प्रथम की पत्नी महारानी कनकवती ने अपने पुत्र जगतसिंह की याद में करवाया था। इस मंदिर में मीराबाई, भगवान कृष्ण तथा भगवान विष्णु की पूजा होती है।

इस मंदिर का निर्माण कार्य 1599 ई. में आरंभ हुआ और 1608 ई. में यह मंदिर बनकर तैयार हुआ। इसका निर्माण हिंदू वास्तु शिल्प के आधार पर हुआ है। महारानी की इच्छा थी कि उनके पुत्र को इस मंदिर के द्वारा सदियों तक याद किया जाए इसलिए इस मंदिर का निर्माण जगत शिरोमणि रखा गया। यह मंदिर आमेर के किले के काफी नजदीक है।

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जन्माष्टमी के मौके पर यहां दूर-दूर से बड़ी संख्या में लोग आते हैं। इस मंदिर को लेकर राजस्थान में कई कहानियां हैं। बताया जाता है मंदिर में स्थापित श्रीकृष्ण की मूर्ति वही है जिनकी पूजा मीराबाई किया करती थीं। मुगल सैनिक श्रीकृष्ण की इस प्रतिमा को न’ष्ट करना चाहते थे लेकिन आमेर के शासकों ने इनकी रक्षा की।

अब जगत शिरोमणि मंदिर में भगवान कृष्ण के साथ उनकी भक्तिनी मीराबाई की भी प्रतिमा लगवाई गई है। मीराबाई एक राजपूत कन्या थीं, उनका विवाह राजा भोज के साथ हुआ था। लेकिन उन्होंने भगवान कृष्ण को ही अपना पति मान लिया था। इसलिए यहां श्रीकृष्ण के साथ इनकी भी पूजा यहां की जाती है।

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