अधिक समय तक बैठे रहने से हो सकता है इन बीमारियों का खतरा

आज की जीवनशैली में, खासकर ऑफिस जॉब करने वालों में बीमारियों की आशंका अधिक होती है। इसकी वजह होती है उनका अधिक समय तक बैठे रहना। अगर आप भी ऐसी ही जॉब करते हैं तो क्या करें, क्या नहीं

आज की जीवनशैली में शारीरिक सक्रियता काफी कम हो गई है। लोग लगातार घंटों बैठे रहते हैं। ये समस्या केवल ऑफिस में काम करने वाले लोगों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि बच्चे और युवा भी पढ़ाई के कारण घंटों बैठे रहते हैं। जो समय बचता है, उसे या तो वे टीवी के सामने बिताते हैं या कंप्यूटर और मोबाइल के साथ। घरेलू महिलाओं का भी ज्यादातर समय बैठे हुए ही गुजरता है। कई अध्ययनों में यह बात सामने भी आ चुकी है कि अधिकतर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण लंबे समय तक बैठे रहना और शारीरिक गतिविधियों की कमी है।
जब आप 30 मिनट से अधिक बैठते हैं
यदि आप लगातार 30 मिनट से अधिक बैठते हैं तो इससे मेटाबॉलिज्म 90 प्रतिशत धीमा हो जाता है। दो घंटों तक लगातार बैठे रहने से अच्छे कोलेस्ट्रॉल का स्तर 20 प्रतिशत तक कम हो जाता है। लगातार बैठे रहना टाइप 2 डायबिटीज, हृदय रोग, कैंसर तथा समयपूर्व मृत्यु होने की आशंका बढ़ा देता है। अगर आप हर आधे घंटे में केवल पांच मिनट का ब्रेक लें और खड़े हो जाएं तो चीजें फिर से सामान्य होने लगती हैं।
सेहत की अन्य समस्याएं
लंबे समय तक बैठने से सिर्फ मोटापे से जुड़ी समस्या नहीं होती, बल्कि इससे डायबिटीज, हृदय रोग, डिप्रेशन, कैंसर, जोड़ों में दर्द और मांसपेशियों से संबंधित समस्याएं भी हो सकती हैं। लगातार बैठे रहना हमारे मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। कहने का मतलब यह है कि लंबे समय तक बैठना आपके लिए हर तरह से जानलेवा है।
बढ़ने लगता है वजन
जब आप बैठे होते हैं, तब खड़े होने या चलने की तुलना में कम ऊर्जा का इस्तेमाल करते हैं। बैठे रहने से कम कैलोरी खर्च होती है, जिससे वजन बढ़ता है और शरीर में ऊर्जा का स्तर कम होता है। धीरे-धीरे पेट और कमर के आसपास वसा का जमाव होने लगता है।
दिल हो सकता है बीमार
हृदय रोगों के तेजी से बढ़ते मामलों को देखते हुए अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने विश्वभर में  लोगों को ‘सिट लेस, मूव मोर’ (बैठें कम, चलें ज्यादा) को अपनाने की आवश्यकता बताई है। दरअसल लंबे समय तक बैठे रहने से हृदय की धमनियों में कैल्शियम ठहर जाता है। हर अतिरिक्त एक घंटे के साथ इसका खतरा 12 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। ऑस्ट्रेलिया में हुए एक शोध की मानें तो लगातार बैठे रहने से शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल का स्तर 20 प्रतिशत तक कम हो जाता है। इस तरह दिन में 14 घंटे से अधिक समय तक बैठने वाले लोगों में हार्ट अटैक का खतरा 54 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।
डायबिटीज का खतरा
अत्यधिक बैठने से रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है और इंसुलिन सेंसिटिविटी कम हो जाती है, जिससे डायबिटीज की चपेट में आने का खतरा और बढ़ जाता है।
स्पाइन से संबंधित समस्याएं
अत्यधिक बैठने से कमर में दर्द तो रहता ही है, साथ ही स्पाइन का स्वास्थ्य भी खराब हो जाता है, क्योंकि एक ही स्थिति में बैठने से मांसपेशियों में कड़ापन आ जाता है। इस स्थिति में स्पाइन विकृत हो सकती है और मांसपेशियां क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। अधिक देर तक बैठने से स्पॉन्डिलाइटिस की आशंका बढ़ जाती है। गलत पॉस्चर इस समस्या को और बढ़ा देता है।
जोड़ों में दर्द होना
लगातार देर तक बैठना जोड़ों में दर्द का कारण भी हो सकता है। इससे मांसपेशियों में भी दर्द रहने लगता है। जब हम खड़े रहते हैं या चलते रहते हैं तो हमारे जोड़ और मांसपेशियां बेहतर तरीके से काम करती हैं। वहीं कंप्यूटर पर कई घंटे काम करने से कंधों में दर्द और शरीर में अकड़न की समस्या हो जाती है।
मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव
लगातार बैठे रहना न्यूरोलॉजिकल समस्याओं की भी आशंका बढ़ा देता है। इससे मस्तिष्क का वो भाग कमजोर और पतला हो जाता है, जो याददाश्त से संबंधित होता है। शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं रहने से नए न्यूरॉन्स का उत्पादन और उनका लचीलापन कम होता है। आंकड़ों की मानें तो अल्जाइमर्स के 13 प्रतिशत मामले निष्क्रिय जीवनशैली के कारण ही होते हैं।