रोड शो के बाद लखनऊ से राजनाथ सिंह ने दाखिल किया नामांकन

लखनऊ। केंद्रीय गृहमंत्री और लखनऊ सीट से बीजेपी उम्मीदवार राजनाथ सिंह ने नामांकन दाखिल कर दिया है। पर्चा भरने से पहले उन्होंने राजधानी लखनऊ में बीजेपी कार्यालय से कलेक्ट्रेट तक रोड शो भी किया।
इस दौरान अटल बिहारी वाजपेयी और राजनाथ सिंह की जयकार के नारे भी लगाए गए। राजनाथ के रोड शो के दौरान उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा और केशव प्रसाद मौर्य नजर आए। इनके अलावा कलराज मिश्र और जेडीयू नेता केसी त्यागी भी मौजूद रहे। रोड शो में भारी संख्या में बीजेपी वर्कर्स और प्रशंसक दिखे। वहीं चुनाव आयोग द्वारा 72 घंटों का बैन लगने की वजह से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसमें शामिल नहीं हो सके।
रोड शो से पहले राजनाथ हनुमान सेतु मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए गए। यहां उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। नामांकन से पहले राजनाथ सिंह ने कहा, ‘मैं देश के 10 राज्यों में दौरा कर चुका हूं जिस प्रकार का उत्साह उत्तर प्रदेश और लखनऊ में है उसी प्रकार का उत्साह पूरे देश में है। तमिलनाडु और केरल में भी नरेंद्र मोदी का ज्वार है। नरेंद्र मोदी ही देश के प्रधानमंत्री बनने चाहिए।’
वहीं बीजेपी के वरिष्ठ नेता और सांसद कलराज मिश्र ने कहा, ‘राजनाथ सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए विपक्ष को उम्मीदवार नही मिल रहा है। हमने लंबे समय से राजनाथ सिंह के साथ काम किया है। राजनाथ और मोदी की जोड़ी ने दुश्मन के छक्के छुड़ा दिए है। पूरी दुनिया में भारत के नाम का डंका बजा है।’
कांग्रेस-एसपी को अभी तक नहीं मिला लखनऊ से उम्मीदवार
बता दें कि अभी तक राजनाथ के खिलाफ कांग्रेस और गठबंधन में से किसी ने लखनऊ सीट से अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। गठबंधन के तहत यह सीट समाजवादी पार्टी (एसपी) के खाते में आई है। लखनऊ में पांचवें चरण यानी 6 मई को चुनाव होने है। पांचवें चरण के नामांकन के लिए कुछ ही दिन शेष बचे हैं लेकिन उनके खिलाफ मजबूत प्रत्याशी उतारने का दम भरने वाला गठबंधन और कांग्रेस, फिलहाल दोनों ही असमंजस में हैं। नतीजा- प्रत्याशी अब तक केवल चर्चाओं में हैं। दो दशक से ज्यादा वक्त से बीजेपी का गढ़ बन चुकी इस सीट पर राजनाथ के खिलाफ कोई ‘दिग्गज’ उतरने को तैयार नहीं है।
कांग्रेस की उलझन
1984 तक कांग्रेस का गढ़ रहे लखनऊ पर गांधी परिवार की निगाह अरसे से लगी हुई है। इसी वजह से पार्टी अपना सबसे बड़ा दांव पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद के रूप में लगाना चाह रही थी। कांग्रेस को उम्मीद थी कि युवा ब्राह्मण और साफ छवि के जितिन लखनऊ के चुनाव को ब्राह्मण बनाम क्षत्रिय में बदल देंगे। इसके अलावा गठबंधन ने भी जितिन को समर्थन दे दिया तो राजनाथ के लिए मुकाबला कड़ा हो जाएगा लेकिन जितिन ने इंकार कर दिया।
इसके बाद कांग्रेस ने आचार्य प्रमोद कृष्णम और अखिल भारतीय हिंदू महासभा के चक्रपाणि महाराज के नामों पर भी मंथन शुरू किया। दाऊद इब्राहिम की कार जलाने से चर्चा में आए भगवा वस्त्रधारी चक्रपाणि महाराज के हिंदूवादी होने से उनके नाम पर कांग्रेस मन बना रही थी, पर अब तक उन पर फैसला नहीं हो पाया है। बताया जाता है कि दोनों नेताओं को भी यह डर है कि कम वक्त में कैसे वह अपनी तैयारी कर पाएंगे। हास्य अभिनेता राजपाल यादव का नाम भी चर्चा तक सीमित रहा। अब पार्टी की निगाहें स्थानीय नेताओं पर हैं।
पूनम बन पाएंगी संयुक्त प्रत्याशी ?
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो लखनऊ में कायस्थ मतदाताओं की संख्या तीन से साढ़े तीन लाख के आसपास है। इसके अलावा सवा लाख के करीब सिंधी वोटर हैं। इसी वजह से एसपी के कुछ नेताओं ने अभिनेता से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी पूनम सिन्हा को लखनऊ से लड़ाने का सुझाव दिया था। पूनम खुद सिंधी हैं। एसपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और शत्रुघ्न सिन्हा की मुलाकात में पूनम के नाम पर चर्चा भी हुई। शत्रुघ्न की शर्त थी कि कांग्रेस भी पूनम के खिलाफ प्रत्याशी खड़ा न करे।
शत्रुघ्न अब कांग्रेस में हैं। उन्हें उम्मीद है कि वह कांग्रेस को मना लेंगे लेकिन एसपी अब तक कोई फैसला नहीं ले पाई है। एसपी को डर है कि अगर आखिरी वक्त में कांग्रेस तैयार न हुई तो उसकी किरकिरी हो सकती है। दूसरा डर यह था कि शत्रुघ्न एक वक्त राजनाथ के करीबी थे और खुद पटना साहिब से चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में अपने चुनाव की वजह से शत्रुघ्न का यहां वक्त दे पाना भी मुमकिन नहीं होगा।
-एजेंसियां

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