प्राध्यापकों को दी MBBS पाठ्यक्रम में हुए बदलाव की जानकारी

मथुरा। के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर में राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग के सौजन्य से एमबीबीएस पाठ्यक्रम में किए गए बदलावों से प्राध्यापकों को रू-ब-रू कराने कि लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया है। कार्यशाला के दूसरे दिन विशेषज्ञ शिशु शल्य चिकित्सक प्रो. श्याम बिहारी शर्मा, मेडिकल एज्यूकेशन यूनिट की प्रमुख डॉ. गगनदीप सिसोदिया, विभागाध्यक्ष प्रसूति एवं स्त्री रोग डॉ. पारुल गर्ग, विभागाध्यक्ष फिजियोलॉजी डॉ. नवीन गौड़ तथा विशेषज्ञ प्रसूति एवं स्त्री रोग डॉ. बी.पी. पाण्डेय ने प्रशिक्षणार्थी प्राध्यापकों को पढ़ाई में रोचकता, लेसन प्लान तथा छात्र-छात्राओं के बौद्धिक मूल्यांकन के तौर-तरीके बताए।

डॉ. गगनदीप सिसोदिया ने बताया कि एमबीबीएस की शिक्षा को छात्र-छात्राएं बोरियत भरा मानते हैं, ऐसे में यदि प्राध्यापक थोड़ा लीक से हटकर तथा रोचक तरीके से पढ़ाएं तो बोरियत जरूर खत्म की जा सकती है। डॉ. सिसोदिया ने बताया कि शिक्षा में सुधार के लिए शिक्षकों को तकनीक का भी इस्तेमाल करना चाहिए ताकि छात्र-छात्राओं की बौद्धिक क्षमता को तेज किया जा सके। उन्होंने कहा कि तकनीक और रोचक तरीके से पढ़ाने से छात्र-छात्राओं को अधिकांश गूढ़ बातें आसानी से स्मरण कराई जा सकती हैं। डॉ. पारुल गर्ग ने कहा कि यदि पढ़ाने में रोचकता का समावेश कर लिया जाए तो छात्र-छात्राओं को किताबी ज्ञान के साथ-साथ प्रयोगात्मक शिक्षा आसानी से ग्रहण कराई जा सकती है।

विशेषज्ञ शिशु शल्य चिकित्सक प्रो. श्याम बिहारी शर्मा और विशेषज्ञ प्रसूति एवं स्त्री रोग डॉ. बी.पी. पाण्डेय ने प्रशिक्षणार्थी प्राध्यापकों को एमबीबीएस के छात्र-छात्राओं के प्रतिभा मूल्यांकन पर विस्तार से जानकारी दी। विभागाध्यक्ष फिजियोलॉजी डॉ. नवीन गौड़ ने लेसन प्लान यानि पाठ योजना पर प्रकाश डालते हुए बताया कि दैनिक पाठ योजना के निर्माण में उद्देश्यों को परिभाषित करना, पाठ्य-वस्तु का चयन करना और क्रमबद्ध करना तथा प्रस्तुतीकरण की विधियों का निर्णय करना प्रमुख होता है।

राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग द्वारा भेजे गए मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, नई दिल्ली के डॉ. दिनेश कुमार की देखरेख में चल रही तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला के पहले दिन डीन डॉ. आर.के. अशोका ने प्राध्यापकों को एमबीबीएस पाठ्यक्रम में हुए व्यापक बदलाव से अवगत कराया था। उन्होंने छात्र-छात्राओं को सामाजिक तथा व्यावहारिक ज्ञान दिए जाने पर भी बल दिया था। ज्ञातव्य है कि एमबीबीएस के छात्र-छात्राओं को अब पहले साल से ही थ्योरी व प्रैक्टिकल के साथ ही हॉस्पिटल में तकनीकी चिकित्सा का प्रायोगिक ज्ञान कराया जाना जरूरी कर दिया गया है।

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