मानसून सत्र से पहले छाता थामकर पीएम ने पत्रकारों को किया संबोधित, कांग्रेस समेत विपक्षी दलों को आड़े हाथ लिया

नई दिल्‍ली। संसद का मानसून सत्र आज से शुरू हो गया। प्रधानमंत्री ने लोकसभा जाने से पहले संसद परिसर में पत्रकारों को संबोधित किया।
प्रधानमंत्री जब मीडिया को संबोधित कर रहे थे, तब रिमझिम बारिश हो रही थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी छाता अपने हाथों में थामे हुए थे। प्रधानमंत्री का यह फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। सोशल मीडिया पर लोग प्रधानमंत्री की सादगी की प्रशंसा कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से लोकसभा में मंत्रिपरिषद के नए सदस्यों का परिचय कराने के दौरान सोमवार को विपक्षी सदस्यों ने हंगामा किया। इसके बाद प्रधानमंत्री ने कांग्रेस समेत कुछ अन्य विपक्षी दलों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि कुछ लोगों को यह रास नहीं आ रहा है कि दलित, आदिवासी, ओबीसी और महिला मंत्रियों का यहां परिचय कराया जाए।
इससे पहले पत्रकारों से चर्चा में प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों से तीखे से तीखे सवाल पूछने को कहा लेकिन साथ ही आग्रह किया कि शांत वातावरण में वे सरकार को जवाब देने का मौका भी दें। उन्होंने कहा कि संसद का मानसून सत्र सार्थक चर्चा के लिए समर्पित हो क्योंकि जनता कई मुद्दों पर जवाब चाहती है और इसके लिए सरकार पूरी तरह तैयार है।
प्रधानंमत्री ने टीका लगाने वालों को ‘बाहुबली’ करार दिया और कहा कि अब तक 40 करोड़ लोगों को कोरोना का टीका लग चुका है और आगे भी यह सिलसिला तेज गति से जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि कोरोना ऐसी महामारी है जिसकी चपेट में पूरा विश्व और मानव जाति है। हम चाहते हैं कि इस संदर्भ में संसद में सार्थक चर्चा हो ओर प्राथमिकता के आधार पर हो। सारे सांसद का सुझाव भी मिले। इससे कोरोना के खिलाफ लड़ाई में बहुत नयापन भी आ सकता है ओर यदि कमियां रह गई हो तो उन्हें ठीक भी किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना महामारी के मुद्दे पर वे सभी मुख्यमंत्रियों और अन्य लोगों से चर्चा करते रहे हैं। उन्होंने इस संबंध में सदन के नेताओं से भी चर्चा करने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि संसद का यह सत्र परिणामकारी हो और सार्थक चर्चा के लिए समर्पित हो। जनता जवाब चाहती है और सरकार की भी जवाब देने की तैयारी है।
विपक्ष की मानसिकता पर सवाल
विपक्षी सदस्यों के हंगामे से नाराज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विपक्ष की मानसिकता पर सवाल उठा दिया। दूसरी ओर राज्यसभा में सभापति वेंकैया नायडू ने भी विपक्षी सांसदों के व्यवहार पर नाराजगी जाहिर की।
लोकसभा की बैठक शुरू होने पर नवनिर्वाचित सदस्यों ने शपथ ली। इसके बाद जब प्रधानमंत्री मोदी मंत्रिपरिषद के नए मंत्रियों का परिचय कराने के लिए उठे तो विपक्षी कांग्रेस के सदस्यों ने नारेबाजी शुरू कर दी। हंगामे के बीच प्रधानमंत्री ने नए मंत्रियों के परिचय का विवरण सदन के पटल पर रखा।
मोदी ने नाराजगी भरे लहजे में कहा कि हम ऐसा सदन में पहली बार देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह ऐसा अवसर है जब किसानों के बच्चों को सदन में प्रस्तुत किया जा रहा है, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला मंत्रियों का परिचय कराया जा रहा है, लेकिन कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं। यह कैसी मानसिकता है?
हंगामा दुर्भाग्यपूर्ण: रक्षामंत्री ने राजनाथ सिंह ने भी हंगामे को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि उन्होंने संसद में ऐसा दृश्य अपने 24 वर्ष के संसदीय जीवनकाल में कभी नहीं नहीं देखा। सिंह ने कहा कि संसद की सबसे बड़ी शक्ति स्वस्थ परंपराएं होती हैं। संसद की ये स्वस्थ परंपराएं संविधान एवं संसद नियमों पर आधारित होती हैं। इन परंपराओं को बनाए रखना सत्ता पक्ष, विपक्ष सभी की जिम्मेदारी है।
उल्लेखनीय है कि मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नए मंत्रियों की शपथ होती है। उसके बाद प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद के सदस्यों का परिचय कराते हैं। पीएम मोदी उसी परंपरा का निर्वाह कर रहे थे, लेकिन कांग्रेस ने हंगामा किया। ये बहुत निंदनीय है।
-एजेंसियां