राजीव शुक्ला का पहला उपन्यास ‘तीन समंदर पार’ प्रकाशित

नई दिल्ली। सियासत और क्रिकेट प्रशासन के जाने माने हस्ताक्षर राजीव शुक्ला अब उपन्यासकार भी बन गए हैं। उनका उपन्यास ‘तीन समंदर पार’ हिंदी के सर्वाधिक प्रतिष्ठित प्रकाशन, राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है।

अपने उपन्यास के प्रकाशन पर खुशी जताते हुए राजीव शुक्ला ने कहा, ‘तीन समंदर पार’ उपन्यास लेखन के क्षेत्र में मेरा पहला प्रयास है। यह उपन्यास एक गरीब परिवार के संघर्ष पर आधारित है जो आज से सवा सौ साल पहले उत्तर प्रदेश के एक गांव से त्रिनिदाद जा बसा था और एक सदी बाद उसके वंशजों में से एक वहां का प्रधानमंत्री बना। बाद में उसकी पुत्री भी राजनीतिक तिकड़मों से लड़कर सत्ता के शीर्ष तक पहुंची।

उन्होंने कहा, यह उपन्यास एक अप्रत्याशित भेंट का नतीजा है जिसने मुझे इस विषय पर जानने और इस कहानी को दुनिया के सामने लाने के लिए प्रेरित किया। इसके बहुत से किरदार वास्तविक कहानियों पर आधारित हैं।

राजीव शुक्ला ने बताया कि उनके उपन्यास के किरदारों की एक खास बात यह है कि सदियों पहले भारत से जाने वाले लोगों के इन वंशजों के मन में भारत के लिए उतना ही प्यार है जितना उनके पुरखों के मन में अपनी मूलभूमि के लिए था।

राजकमल प्रकाशन के प्रबंध निदेशक अशोक महेश्वरी ने कहा, अनुभवों की अभिव्यक्ति साहित्य का महत्वपूर्ण आधार है। राजीव शुक्ला जी ने सियासत और क्रिकेट प्रशासन में बड़ी भूमिका निभाई है और अब भी निभा रहे हैं। उनके पास अनुभवों का भंडार है, उन्होंने अपना एक विशिष्ट अनुभव उपन्यास के रूप में लिखा। हमें प्रसन्नता है कि यह उपन्यास राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित होकर लोगों तक पहुँच रहा है।

उन्होंने कहा, यह उपन्यास एक अप्रत्याशित यात्रा, एक अनथक संघर्ष और एक असाधारण उपलब्धि की कहानी कहता है। इसका एक महत्त्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि झूठ और छल से अर्जित सत्ताएं अंततः जनता के आगे बेनकाब हो जाती हैं। मुझे विश्वास है कि इस पुस्तक से लोगों को न केवल राजीव शुक्ला जी के समर्थ लेखक रूप का परिचय मिलेगा बल्कि भारत से दूर जा बसे भारतीयों के अपूर्व संघर्ष और उपलब्धियों की जानकारी भी।