देश में पहली बार पुरुषों के मुकाबले अधिक हुईं महिला टीचर

देश में पहली बार महिला स्कूल टीचर्स ने अपने पुरुष समकक्षों को पछाड़ दिया है। देश के 96.8 लाख टीचर्स में से 49.2 लाख महिलाएं हैं। 2012-13 में, 42.4 लाख पुरुष टीचर्स के मुकाबले देश भर में 35.8 लाख महिला टीचर्स थीं। सात साल में महिला टीचर्स की संख्या में 37% या 13 लाख से अधिक की वृद्धि हुई है। इसी अवधि में पुरुष शिक्षकों की संख्या 42.4 लाख से बढ़कर 47.7 लाख हो गई। पिछले सप्ताह जारी 2019-20 के लिए यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन ऑन स्कूल एजुकेशन (यू-डीआईएसई) रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।
प्राइमरी में 1 लाख से अधिक महिला टीचर्स
हालांकि इस रिपोर्ट का एक दूसरा हिस्सा भी है। इसके अनुसार प्राथमिक स्तर पर ही महिला टीचर्स टॉप पर हैं। रिपोर्ट के अनुसार अपर प्राइमरी के बाद से पुरुष टीचर्स की संख्या अधिक बनी हुई है। प्री-प्राइमरी लेवल पर महिला शिक्षकों की संख्या लगभग 27,000 पुरुषों की तुलना में 1 लाख से अधिक है। 19.6 लाख महिलाएं और 15.7 लाख पुरुष टीचर्स के साथ प्राइमरी ग्रेड में अनुपात अधिक संतुलित है।
अपर प्राइमरी में पुरुष टीचर्स आगे
अपर प्राइमरी क्लासेज में 11.5 लाख पुरुष और 10.6 लाख महिला शिक्षक हैं। इसके बाद से यह गैप अधिक बढ़ता जाता है। सेकेंडरी स्कूल में 6.3 लाख पुरुष और 5.2 लाख महिला टीचर्स हैं। हायर सेकेंडरी में, यह 3.7 लाख पुरुषों से 2.8 लाख महिलाओं तक है। गवर्नमेंट व एडिड स्कूलों में पुरुष टीचर्स की संख्या अधिक है। जबकि अनऐडिड प्राइवेट स्कूलों में महिला टीचर्स की संख्या अधिक है।
ये राज्य हैं अपवाद
बड़े राज्यों में केरल, दिल्ली, मेघालय, पंजाब और तमिलनाडु को छोड़ कर हाईग्रेड में महिलाओं से अधिक पुरुष शिक्षकों का ट्रेंड देखने को मिल रहा है। अपवाद वाले राज्यों में सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी में भी पढ़ाने वाली महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में अधिक है। केरल में कुल टीचर्स में 79%, पंजाब में 76%, तमिलनाडु में 75% और दिल्ली में 74% महिला टीचर्स हैं।
महिला और पुरुषों की संख्या समान होनी चाहिए
महिला टीचर्स की संख्या अधिक होने को लेकर टीचर फाउंडेशन की संस्थापक निदेशक माया मेनन ने कहा कि कोई भी गतिशील और महत्वपूर्ण पेशा जिसमें मैं टीचिंग को भी मानती हूं, उसमें पुरुषों और महिलाओं का समान वितरण होना चाहिए। मेनन ने कहा कि बच्चों को उन शिक्षकों से सीखने की जरूरत है जो एक पुरुष के साथ-साथ एक महिला दृष्टिकोण भी पेश कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि शुरुआती कक्षाओं में भारत में कई स्कूल महिला शिक्षकों को पसंद किया जाता है क्योंकि उन्हें अधिक नर्चरिंग करने वाला माना जाता है।
-एजेंसियां