संसद की स्थायी समिति ने अब फ़ेसबुक और गूगल को तलब किया

सूचना प्रोद्यौगिकी पर संसद की स्थायी समिति ने फ़ेसबुक और गूगल के अधिकारियों को ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के ग़लत इस्तेमाल और नागरिकों के अधिकारों पर चर्चा के लिए समन जारी किया है. इन अधिकारियों को मंगलवार को पेश होने के लिए कहा गया है.
कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली समिति इन कंपनियों से नागरिक अधिकारों की सुरक्षा और सोशल मीडिया के ग़लत इस्तेमाल पर राय जानेगी.
रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेस नेता थरूर ने कहा है, “फ़ेसबुक इंडिया और गूगल इंडिया के प्रतिनिधियों की नागरिक अधिकारों को सुनिश्चित करने और सोशल/ऑनलाइन न्यूज़ मीडिया प्लेटफ़ॉर्म के ग़लत इस्तेमाल को रोकने पर उनकी राय जानेंगे. डिजिटल दायरे में महिला सुरक्षा पर भी ख़ास ज़ोर होगा.”
इससे पहले फ़ेसबुक के प्रतिनिधियों ने संसदीय समिति को सूचित किया था कि कोविड-19 प्रोटोकॉल के तहत उनकी कंपनी व्यक्तिगत रूप से पेश होने की अनुमति नहीं देती है.
फिर समिति के चेयरमैन थरूर ने फ़ेसबुक को कहा था कि संसद सचिवालय वर्चुअल बैठक की अनुमति नहीं देता है इसलिए व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहना होगा.
यह समिति आगे यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म के प्रतिनिधियों को भी इसी मुद्दे पर बातचीत के लिए समन भेजेगी.
ट्विटर हो चुका है पेश
18 जून को ट्विटर के प्रतिनिधि भारत में नए आईटी नियमों समेत कई मुद्दों को लेकर इस पैनल के सामने पेश हो चुके हैं.
इस दौरान माइक्रोब्लॉगिंग साइट पर यूज़र के कंटेंट अपलोड करने और भारत के क़ानून के सम्मान करने पर चर्चा हुई थी. ट्विटर की ओर से उनकी वकील आयुषी कपूर और पब्लिक पॉलिसी मैनेजर शगुफ़्ता कामरान पेश हुई थीं और बताया था कि ट्विटर अपनी नीतियों का पालन करता है.
ऐसी रिपोर्ट सामने आई हैं, जिनके बाद उन्हें कहा गया कि ‘भारतीय क़ानून सर्वोपरि है और कंपनी को भारत में भारत के क़ानून के हिसाब से चलना होगा.’
इसके बाद एक ट्विटर प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी समिति के साथ नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा करने को लेकर पारदर्शिता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और गोपनीयता के हमारे सिद्धांतों के अनुरूप काम करने को तैयार है.
ट्विटर और भारत सरकार के बीच खींचतान
भारत सरकार और ट्विटर के बीच रस्साकशी नए आईटी नियमों के सामने आने के बाद शुरू हो गई थी लेकिन इसके बाद कुछ ऐसे मामले सामने आए जिसके बाद दोनों के बीच काफ़ी बहसबाज़ी देखने को मिली है.
25 फ़रवरी को भारत सरकार ने नए आईटी नियमों की घोषणा की थी और इन्हें 25 मई को लागू कर दिया था लेकिन ट्विटर ने इनकी अनदेखी करते हुए अपने यहाँ ग्रीवांस रिड्रेसल ऑफ़िसर (शिकायत निवारण अधिकारी) की नियुक्ति नहीं की.
बाद में इस ऑफ़िसर की नियुक्ति हुई, लेकिन रविवार को उन्होंने भी इस्तीफ़ा दे दिया है.
इसके अलावा ट्विटर ने कथित ‘कांग्रेस टूलकिट’ मामले में बीजेपी नेताओं के ट्वीट पर ‘मैनिपुलेटेड मीडिया’ का टैग लगाया था, जिसके बाद सरकार ने ट्विटर को यह हटाने को कहा था और दिल्ली पुलिस ने बेंगलुरु जाकर ट्विटर इंडिया के प्रमुख मनीष माहेश्वरी से पूछताछ की थी.
हाल ही में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद का ट्विटर हैंडल कुछ समय के लिए डिएक्टिवेट करने के बाद भी काफ़ी विवाद पैदा हुआ था.
-BBC