मकर संक्रांति: पर्व एक नाम अनेक

आप लोगों में से अधिक लोग जानते होंगे कि 14 जनवरी को मनाया जानेवाला मकर संक्रांति [ कभी-कभी यह एक दिन पहले या बाद में भी मनाया जाता है ] एक ऐसा त्योहार है जो भारत के विभिन्न प्रान्तों में, विभिन्न रूपों में, अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है यानि किसी भी अन्य पर्व में इतने अधिक रूप प्रचलित नहीं हैं जितने इस त्योहार को मनाने के हैं । सभी प्रान्तों में मकर संक्रांति वाले दिन उस जगह प्रचलित धार्मिक क्रियाकलाप जैसे जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तपर्ण वगैरह ही होता है । इसके अलावा अनेकों जगह लोग पतंग भी उड़ाते हैं ।

आपके ध्यान्नार्थ छत्तीसगढ़, गोआ, ओड़ीसा, हरियाणा, बिहार, झारखण्ड, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, राजस्थान, सिक्किम, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, पश्चिम बंगाल, गुजरात और जम्मू में इसे मकर संक्रान्ति तो कहते ही हैं लेकिन कुछ प्रान्तों में इसको इस नाम के अलावा अन्य नाम से भी जाना जाता है जैसे हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब में माघी, तमिलनाडु में ताइ पोंगल / उझवर /तिरुनल, असम में भोगाली बिहु, कश्मीर घाटी में शिशुर सेंक्रात, उत्तर प्रदेश और पश्चिमी बिहार में खिचड़ी, पश्चिम बंगाल में पौष संक्रान्ति, कर्नाटक में मकर संक्रमण, गुजरात, उत्तराखण्ड में उत्तरायण और पंजाब में लोहड़ी ।

अपने देश के अलावा विश्व के अन्य भागों में भी यह मकर संक्रांति का पर्व, बांग्लादेश में संक्रेन / पौष संक्रान्ति, नेपाल में माघे संक्रान्ति या ‘माघी संक्रान्ति’ या ‘खिचड़ी संक्रान्ति, थाईलैण्ड में सोंगकरन, लाओस में पि मा लाओ, म्यांमार में थिंयान, कम्बोडिया में मोहा संगक्रान एवं श्री लंका में पोंगल, उझवर तिरुनल नामों से, भांति-भांति के रीति-रिवाजों द्वारा भक्ति एवं उत्साह के साथ बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है ।

सनातन धर्मानुसार हर माह के 2 भाग हैं- कृष्ण और शुक्ल पक्ष जो चन्द्र के आधार पर है और ठीक इसी प्रकार सूर्य के आधारानुसार हर वर्ष के भी दो भाग होते जिसे हम उत्तरायन और दक्षिणायन मानते हैं । मकर संक्रांति वाले दिन से धरती का उत्तरी गोलार्द्ध सूर्य की ओर हो जाता है [ जिसे हम सोम्यायन भी कह सकते हैं ] जिसके परिणामस्वरुप सूर्य भगवन उत्तर दिशा से उदय होते हैं । मकर संक्रांति वाले दिन से कर्क संक्रांति के बीच छै माह का जो समय होता है उसे उत्तरायन कहते हैं जबकि कर्क संक्रांति से मकर संक्रांति वाले दिन तक छै माह वाले समय को दक्षिणायन । उत्तरायन देवताओं का दिन यानि देवयान और दक्षिणायन देवताओं की रात्रि यानि पितृयान मानते हैं । इसलिये ही मकर संक्रांति से यानि माघ मास से प्रारम्भ होने वाले उत्तरायन में सभी प्रकार के शुभ कार्य प्रारम्भ हो जाते हैं।

यह ऐतिहासिक तथ्‍य है कि प्रभु श्री कृष्ण ने उत्तरायण का महत्व बताते हुए श्री मद्भागवत गीता में कहा है कि उत्तरायण के छह मास के शुभ काल में, जब सूर्य देव उत्तरायण होते हैं और पृथ्वी प्रकाशमय रहती है तो इस प्रकाश में शरीर का परित्याग करने से व्यक्ति का पुनर्जन्म नहीं होता, ऐसे लोग ब्रह्म को प्राप्त होते हैं। इसी उपदेशानुसार बाणों की शय्या पर पड़े भीष्म पितामह ने मकर संक्रांति वाले दिन ही यानि सूर्य उत्तरायण होने के बाद इच्छामृत्यु वरदानुसार स्वेच्छा से अपना नश्वर शरीर का परित्याग किया था ।

यह भी ऐतिहासिक तथ्‍य है कि मकर संक्रांति के ही दिन माता गंगा महाराज भगीरथ के पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से गुजरते हुए सागर में समा गयी थी लेकिन उसके पहले माता ने महाराज भगीरथ द्वारा जो अपने पूर्वजों के आत्मा की शांति के लिए तर्पण किया उसे स्वीकार किया था ।इसी कारण से मकर संक्रांति पर तर्पण प्रथा है और हर साल मकर संक्रांति पर गंगा सागर में मेला भी लगता है। कुम्भ के पहले स्नान की शुरुआत भी मकर संक्रांति वाले दिन से होती है ।

एक अन्य रोचक ऐतिहासिक तथ्यानुसार मकर संक्रांति के दिन भगवान विष्णु ने मधुकैटभ राक्षस को पराजित कर उसका वध किया फिर युद्ध समाप्ति की घोषणा करने के पश्चात उसे विशाल मंदार पर्वत के नीचे दबा दिया था। इसलिए इस दिन से भगवान विष्णु मधुसूदन कहलाने लगे ।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार मकर संक्रांति के दिन से ही जलाशयों में वाष्पन / वाष्पीकरण क्रिया शुरू होने लगती है, जिसमें स्नान करने से स्फूर्ति व ऊर्जा का संचार होता है। धार्मिकता के अलावा यह भी एक कारण है कि इस दिन झुण्ड के झुण्ड में लोग पवित्र नदी और जलाशयों में स्नान करने जाते हैं । इसके अलावा इस दिन गुड़ व तिल खाने से शरीर को उष्णता व शक्ति मिलती है और खिचड़ी खाने से प्रतिरोधात्मक शक्ति भी बढती है ।

उपरोक्त वर्णित तथ्यों से यह स्पष्ट होता है कि मकर संक्रांति वाला पर्व एकता में अनेकता को अति बढ़िया रुप में प्रदर्शित करता है। इसके अलावा आज के डिजीटलाईजेशन के समय में होली,दीपावली वगैरह त्यौहारों की तरह मकर संक्रांति त्यौहार से सम्बन्धित ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी, आकर्षक बधाई सन्देश कार्ड द्वारा , ईमेल एवं वॉट्सऐप के माध्यम से आदान प्रदान कर इस त्यौहार को बहुत ही प्रभावी भी बनाता है।

  • गोवर्धन दास बिन्नाणी “राजा बाबू”
    जय नारायण ब्यास कालोनी
    बीकानेर