दिल के लिए घातक है Hypertension – डा.एस.एस. सिबिया

सिबिया मेडिकल सेंटर के निदेशक डा. एस.एस. सिबिया
सिबिया मेडिकल सेंटर के निदेशक डा. एस.एस. सिबिया

सिबिया मेडिकल सेंटर के निदेशक डा.एस.एस. सिबिया का कहना है कि हमारा दिल लगातार रक्त वाहिकाओं के जरिये शरीर के विभिन्न हिस्सों को खून सप्लाई करता है। खून के बहाव का दबाव वाहिका की दिवार पर पड़ता है। इसी दबाव की माप को रक्तचाप कहते हैं। जब यह दबाव एक निश्चित मात्रा से बढ़ जाता है तो इसे Hypertension या उच्च-रक्तचाप कहा जाता है। किसी भी व्यक्ति में उच्च रक्तचाप को समान्य के बाद तीन भागों में वॉट सकते हैं। इसमें प्रारंभिक, मध्यम व अत्याधिक उच्च रक्तचाप को अलग-अलग स्तरों पर रखते हैं।

प्रारंभिक और मध्यम स्तर तक Hypertension के आमतौर पर कोई खास लक्षण व्यक्ति में नजर नहीं आते। इसी कारण इसे ‘साइलेंट किलर’ की संज्ञा भी दी जाती है। यदि लक्षणों पर गौर करें तो बार-बार होने वाला सिर दर्द, धुंधला दिखाई देना, नींद न आना, चक्कर आना आदि उच्च रक्तचाप के संकेत हो सकते हैं। उच्च रक्तचाप के द्वारा स्वास्थ संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न होती है। इसके कारण हृदय और गुर्दा रोग, मस्तिष्क आघात (ब्रेन स्ट्रोक) आंखों को क्षति पहुंचना जैसे गंभीर परिणाम हो सकते हैं.
उच्च रक्तचाप के उपचार के लिए लोग भिन्न-भिन्न पद्घतियां अपनाते हैं। कुछ एलोपैथी पर यकीन करते हैं और कुछ का भरोसा होम्योपैथी पर है। इसके अलावा और भी कई तरीकों से उच्च रक्तचाप का उपचार किया जा रहा है। एक्यूपंक्चर की कोरियाई तकनीक एक उपचार पद्ति है जिसमें हाथों-पैरों की उंगलियों में कुछ खास बिन्दुओं पर सुइयां चुभा कर रोग का उपचार किया जाता है। संगीत के द्वारा भी इस रोग का उपचार किया जाता है। ऐसी संगीत रचनाएं जिनकी ताल इन्सान के दिल की धडकन के बराबर (72 प्रति मिनट) होती है, बहुत राहत देने वाली होती है। डा.एस.एस. सिबिया का कहना है कि दिल के रोगियों के अब एसीटी प्रक्रिया दिल के रोगियों के लिए नया वैकल्पिक उपचार है, जिसमें रक्त धमनियों में हुई ब्लॉकेज(रूकावट)खोलने का काम सफलतापूर्वक किया जाता है। इस उपचार में एक रोगी को तीस बार तक ग्लूकोज में दवाएॅ मिलाकर ड्रिप दी जाती है, जिसमें लगभग तीन घंटे का समय हर बार लगता है। इसमें रोगी को न तो चीर-फाड़ होती है, दूसरा फायदा रोगी को अस्पताल में भर्ती भी नहीं होना होता और तीन घंटे के उपचार के बाद रोगी खुद घर जा सकता है, उपचार के तीन घंटे के दौरान वह आराम-विश्राम भी कर सकता है। दवा पी सकता है और बैठे-बैठे अपना अन्य काम कर सकता है। इस एसीटी प्रक्रिया से ह्रड्ढदय के रोगियों को काफी राहत मिलती है। इस प्रक्रिया को किलेशन थैरपी कहते हैं।

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