Year Ender: मंदी के माहौल में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंची बेरोजगारी की दर

साल 2019 में मंदी के माहौल ने कंपनियों के साथ ही लोगों पर भी अपना असर दिखाया। इससे लोगों की नौकरियों पर संकट देखने को मिला। अक्तूबर में बेरोजगारी दर तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। वहीं छह सालों में इस साल सबसे कम लोगों को नौकरी मिली। सितंबर तक निजी क्षेत्र में इस साल करीब 45 लाख लोगों को रोजगार मिला है। हालांकि आधे से ज्यादा रोजगार देने में केवल दो सेक्टर का योगदान रहा है। वहीं सरकारी कंपनियों में नौकरी मिलने में गिरावट देखने को मिली है। यह तब है जब सरकार मेक इन इंडिया को बढ़ावा दे रही है। 

आईटी, वित्तीय सेवा कंपनियों में सबसे ज्यादा नौकरी

देश की टॉप 250 लिस्टेड कंपनियों में पिछले एक साल में सबसे ज्यादा लोगों को नौकरी मिली है। इसमें वित्तीय सेवा क्षेत्र में 28 फीसदी (13 लाख लोग) और 26 फीसदी हिस्सा आईटी कंपनियों का है। निजी क्षेत्र में लोगों को नौकरी मिलने में 9.2 फीसदी का इजाफा देखने को मिला है। वहीं टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी कंपनियों और बैंकों में नौकरी के लिए लोगों की संख्या में 2.6 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है।

इन कंपनियों में सबसे ज्यादा कटौती

लोगों को नौकरी देने के मामले में सरकारी कंपनियां और बैंक लगातार कमी कर रहे हैं। पिछले एक साल की बात करें तो फिर रोजगार देने के मामले में कोल इंडिया में 4.4 फीसदी और भारतीय स्टेट बैंक में 2.6 फीसदी की कमी देखने को मिली है।

इन कंपनियों में सबसे ज्यादा कर्मचारी

लिस्टेड कंपनियों में निजी क्षेत्र की टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज में सबसे ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं। 4,20,000 कर्मचारियों की संख्या के साथ यह कंपनी पहले स्थान पर है। इस कंपनी में महिला कर्मचारियों की संख्या भी 1,52,114 है जो कि सबसे ज्यादा है। यह उनके कुल कर्मचारियों का कुल 36 फीसदी हिस्सा है। हालांकि महिलाओं की सबसे ज्यादा संख्या इंफोसिस में है, जो कि 37 फीसदी है। इस एक साल के दौरान Ques Corp ने सबसे ज्यादा 56,300 लोगों को नौकरी पर रखा था। 

अक्तूबर में तीन साल के उच्चतम स्तर पर बेरोजगारी दर 

भारत की बेरोजगारी दर अक्तूबर माह में तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, अक्तूबर में  बेरोजगारी दर 8.5 फीसदी रही, जो कि अगस्त 2016 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है। 

छह साल में सबसे कम लोगों को मिली नौकरी 

नवंबर में अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर सस्टेनेबल इंप्लायमेंट के द्वारा जारी एक शोध पत्र में दावा किया गया कि पिछले छह सालों में लोगों को रोजगार मिलने की संख्या में काफी गिरावट आई है। 2011-12 से लेकर के 2017-18 के बीच 90 लाख लोगों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी। भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है। देश के तीन राज्यों में स्थिति सबसे ज्यादा खतरनाक हो गई है। 

सीएमआईई के आंकड़ों के मुताबिक त्रिपुरा, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में लोगों को नौकरियां ढूंढने पर भी नहीं मिल रही हैं। त्रिपुरा में बेरोजगारी दर 23.3 फीसदी रिकॉर्ड की गई है। 

इन सेक्टर में आई भीषण मंदी

सीएमआईई के एमडी और सीईओ महेश व्यास के मुताबिक देश के ग्रामीण और शहरी इलाकों में बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है। इसमें भी शहरी इलाकों में लोगों को नौकरियां नहीं मिल रही हैं। ऑटो सहित कई सेक्टर में हालत बिगड़ने से भी यह असर देखने को मिल रहा है। टेक्सटाइल, चाय, एफएमसीजी, रियल एस्टेट जैसे सेक्टर में भीषण मंदी आई है। 

सीएमआईई ने जो डाटा जारी किया था, उसके मुताबिक 2016 से 2018 के बीच 1.1 करोड़ लोगों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा था। फरवरी 2019 में बेरोजगारी का आंकड़ा 7.2 फीसदी पर पहुंच गया। वहीं पिछले साल फरवरी में यह आंकड़ा 5.9 फीसदी था। 

लोगों की नौकरी छूटी

रिपोर्ट के मुताबिक जहां पिछले साल 40.6 करोड़ लोग नौकरी कर रहे थे, वहीं इस साल फरवरी में यह आंकड़ा केवल 40 करोड़ रह गया। इस हिसाब से 2018 और 2019 के बीच करीब 60 लाख लोग बेरोजगार हो गए। 

शहरी क्षेत्रों में बढ़ी संख्या

इसी साल मई में जारी रिपोर्ट में कहा गया था कि शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारों की संख्या 7.8 फीसदी रही, वहीं ग्रामीण इलाकों में यह 5.3 फीसदी रही थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि नोटबंदी के चलते नई नौकरियों की संख्या में काफी गिरावट आ गई थी, जो अभी संभली नहीं है। 

युवा बेरोजगारी दर में कमी 

युवा बेरोजगारी दर में भी कमी आई है। 15-29 साल के युवा जो देश की कुल आबादी में एक तिहाई हैं, उनकी बेरोजगारी दर जनवरी-मार्च तिमाही में गिरकर 22.5 फीसदी रही। वहीं अक्तूबर-दिसंबर (2018) तिमाही की बात करें तो यह दर 23.7 फीसदी थी। बेरोजगारी को लेकर ये रिपोर्ट ‘करेंट वीकली स्टेटस’ को आधार मानकर तैयार की गई है, जिसके तहत किसी  भी शख्स को उस हफ्ते में बेरोजगार माना जाता है, जिस सप्ताह में वह एक घंटे के लिए भी काम नहीं करता या फिर उसको काम नहीं मिलता है।

इन सेक्टर पर भी पड़ा असर

ऑटो इंडस्ट्री और एविएशन सेक्टर में कई लोगों को नौकरी से निकाला जा चुका है। ऑटो के साथ ही चाय, बिस्किट, कताई जैसे उद्योग में भी लोगों की नौकरियां जा सकती हैं, जिससे बेरोजगारी और बढ़ने की संभावना है। चाय उद्योग से भी 10 लाख कर्मचारी बाहर हो सकते हैं, क्योंकि लागत के मुकाबले बिक्री मूल्य काफी कम हो गया है। बिस्किट बनाने वाली कंपनी पारले-जी ने भी कहा था कि उसके यहां से 10 हजार लोगों को निकाला जा सकता है।