इस वजह से महाविकास आघाड़ी की सरकार बनी, जानिए पूरा मामला

भारतीय जनता पार्टी का राज महाराष्ट्र में कैसे नहीं आया? इसके बजाय तीन दलों ने एक साथ आकर शिवसेना मुख्यमंत्री कैसे आये, ये समझने की जरूरत है. 24 अक्टूबर स 21 नवंबर के बीच 80 घंटे की सरकार आई और गई. इस सरकार की याद किसी को नहीं है. इस पूरे मामले में राजभवन की भूमिका खलनायक जैसी रही. यह तीखा बयान शिवसेना नेता संजय राऊत ने दिया है.

मैं राजभवन को बदनाम नहीं होने दूंगा-


संजय राऊत ने कहा कि महाराष्ट्र के राज्यपाल को मैं व्यक्तिगत तौर पर अच्छी तरह से जानता हूं. वे सज्जन गृहस्थ है. राजभवन में जाकर उनसे मुलाकात की. कोश्यारी ने उस वक्त स्पष्ट कहा कि मैं संविधान से बंधा हुआ हूं. संविधान को मोड़कर मैं कुछ नहीं करुंगा. मैं राजभवन को बदनाम नहीं होने दूंगा. इतने के बावजूद भाजपा के देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री और अजीत पवार को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई. विधायकों के सिग्नेचर को मान्य करते हुए उन्होंने सारी चीजें होने दी. उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें राजभवन की बजाय ऊपर का आदेश महत्वपूर्ण रहा.