Movies Reviews: एक अलग दुनिया ले जाती है ‘मरजावां ‘….

इस फिल्म में कहानी रघु की (सिद्धार्थ मल्होत्रा) है जो अन्ना (नासर ) का खरीद गुलाम है क्योंकि अन्ना ने बचपन में उसे गटर से उठाके पाल पोस कर बड़ा किया है और इसीलिए अन्ना की गुंडागर्दी में वह चुपचाप अन्ना का सबसे खतरनाक हथियार बना हुआ है और इसीलिए अन्ना उससे प्यार भी बहुत करता है. मगर अन्ना का बेटा विष्णु (रितेश देशमुख) रघु से बहुत जलता है उसे लगता है कि उसका बौना कद के कारण उसका बाप उससे ज्यादा रघु से प्यार करता है. आगे कहानी में अपनी असुरक्षा के चलते विष्णु रघु की दुनिया खत्म करना चाहता है. नफरत की यह आग आगे चलकर क्या गुल खिलाती है यही कहानी है फिल्म मरजावां की.

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समीक्षाः
अगर फिल्म की समीक्षा की बात करें तो एक के बाद एक कई फ्लॉप फिल्मों के बाद सिद्धार्थ मल्होत्रा के लिए एक हिट फिल्म ज़रूरी थी और तारा सुतारिया को डेब्यू के बाद आए गैप के बाद एक उछाल चाहिए था, लेकिन मरजावां देखने के बाद ऐसा मुमकिन नहीं लग रहा है. बाकि कहानी वैसी ही पुरानी लव-स्टोरी जैसी है. घिसी पिटी हुई. नोरा फतेही रिमिक्स गाने पर नाचती हुई नज़र आएंगी और आप बोर होकर चाय-कॉफी पीने के लिए बाहर जाएंगे और जब आप वापस आएंगे तो कहानी वहीं की वहीं रहेगी.