एवरेस्ट में लाशों का ढ़ेर छुपा है,जानिए पूरा मामला

एक हिंदुस्तानी व्यक्ति 1996 से एवेरेस्ट में 8500 मीटर की उचाई पर स्थित गुफा में आज भी आराम कर रहा है। बता दें कि एवेरेस्ट में चढ़ने वालों द्वारा इसको एक सीमा चिन्ह की तरह इस्तमाल किया जाता है, और इसको ग्रीन बूट्स यानी हरा जूता बुलाया जाता है। इसके शरीर को यहाँ से वापस ले जाना फिलहाल नामुमकिन ही है।

dead body on mountain साठी इमेज परिणाम

इसी तरह एवेरेस्ट में 8000 m से उप्पर के इलाके में 200 से अधिक शव मौजूद हैं। इस इलाके का नाम रेनबो वैली है। इस इलाके का नाम रेनबो वैली रखने के पीछे का कारण यह था की यहाँ ढेर सारे पर्वता रोहियों के शव दूर दूर तक बिखरे हुए हैं, जिनके भाती भाती के रंगों वाले कपड़ो व जूतों से नजारा रंग बिरंगी लगता है। जो भी पर्वतारोही एवेरेस्ट पे जाता है उसको ये भयावह नजारा देखने को मिलता है।

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8000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाके को डेथ जोन बोलते हैं मतलब यहाँ इतनी कम ऑक्सीजन है की आपका शरीर धीमे धीमे मरने लगता है। आपको 2 किलो वजन ले जाने में इतनी थकान लगेगी जितना की 10 किलो में । ऑक्सीजन सिलेंडर होने के बाद भी वायु दाब बहुत कम होने से फेफड़े उतने अच्छे से काम नहीं करते और सिलिंडर भी कुछ घंटों से ज्यादा नहीं चलते ।