अयोध्या के रुके मास्टर प्लान का काम फिर शुरू होगा

अयोध्‍या। राम मंदिर के भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद अयोध्या के रुके मास्टर प्लान का काम फिर शुरू होगा। खास बात यह है कि महायोजना-2031 में अयोध्या में धार्मिक इस्तेमाल के भू-उपयोग में इजाफा किया जाएगा।
सूत्र बताते हैं कि श्रीराम जन्मभूमि के आसपास के क्षेत्र को भी धार्मिक भू-उपयोग में बदला जाएगा। इसके अलावा मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन तय होते ही, उसका भी भू-उपयोग धार्मिक किया जाएगा।
सूत्रों की मानें तो जल्द उस कंपनी के साथ टेंडर एग्रीमेंट हो जाएगा, जिसे टेंडर अवॉर्ड किया गया था। इसके अलावा हैदराबाद स्थित नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर से अयोध्या की सैटलाइट इमेज मांगी गई हैं। अयोध्या के मेयर ऋषिकेश उपाध्याय के मुताबिक 41 ग्रामसभाएं भी इस महायोजना में जोड़ी जाएंगी।
भव्य मंदिर के लिए ज्यादा जमीन की जरूरत
अमृत योजना के तहत प्रदेश में चयनित 60 शहरों की महायोजना तैयार की जानी थी, लेकिन अयोध्या समेत 34 शहरों का काम रोक दिया गया था। अब इसे दोबारा शुरू किया जाना है। 2031 तक के लिए अयोध्या का मास्टर प्लान तैयार करने के लिए कंपनी का चयन हो गया था लेकिन अब तक उसके साथ एग्रीमेंट नहीं किया गया। अब दोबारा काम शुरू होने की सुगबुगाहट इसलिए हो रही है, क्योंकि नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर से नगर की सैटलाइट इमेज मांगी गई है। माना जा रहा है कि एक महीने के भीतर इमेज आ जाएंगी और इसके अनुसार काम शुरू हो जाएगा।
वहीं, 2021 के लिए बनाए गए मास्टर प्लान को रिवाइज किया जाएगा। इस बारे में आधिकारिक तौर पर तो अधिकारी नहीं बोल रहे, लेकिन मेयर कहते हैं कि भव्य मंदिर तैयार करने के लिए ज्यादा जमीन की जरूरत होगी। इसके तहत धार्मिक भू-उपयोग में इजाफा किया जाएगा।
हर सुविधा को किया जाएगा लोकेट
आवास विभाग के अधिकारियों के मुताबिक मास्टर प्लान में हर तरह की सुविधाओं को लोकेट किया जाएगा। मसलन, जहां-जहां सीवर लाइन, पानी की लाइन डाली जाएंगी, उनको भी महायोजना में दर्शाया जाएगा। वहीं, एसटीपी, ओवर हेड टैंक आदि भी दिखाई जाएंगी।
घाट, होटल, पार्क, स्कूल, अस्पताल होंगे तय
अयोध्या का 2021 का मास्टर प्लान भी तय नहीं था। जानकारों की मानें तो विवादित स्थल के फैसले के चलते ही भू-उपयोग तय नहीं किया जा रहा था। अब विवाद खत्म होने के बाद अयोध्या को विकसित करने का खाका तैयार करने की कवायद शुरू हो रही है। अयोध्या के बड़े धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में तब्दील होने की उम्मीद है। ऐसे में होटलों की संख्या में इजाफा होगा।
सूत्र बताते हैं कि पंचकोसी और 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के आसपास कई होटलों के लिए जमीन आरक्षित की जाएगी। वहीं, स्कूल और डिग्री कॉलेजों के लिए भी अलग जमीन चिह्नित होनी है। इंफ्रास्ट्रक्चरल डिवेलपमेंट के तौर पर अस्पताल, नए फायर स्टेशन, पार्क आदि को भी चिह्नित किया जाना है। यहां अब तक एसटीपी नहीं है। ऐसे में आबादी और पर्यटन की आमद बढ़ने पर एसटीपी बनाना भी अनिवार्य होगा।
-एजेंसियां

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