महाराष्ट्र: शिवसेना से गठबंधन को लेकर उलझन में क्यों है कांग्रेस?

महाराष्ट्र में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के बीच सरकार बनाने को लेकर अभी तक सहमति का फॉर्मूला नहीं बन सका है. कांग्रेस महाराष्ट्र में फूंक-फूंक कर कदम रख रही है और शिवसेना के साथ गठबंधन को लेकर उलझन में फंसी हुई है. धर्मनिरपेक्षता कैंप की अगुआई करने वाली कांग्रेस के लिए उग्र हिंदुत्व की पैरोकारी करने वाली शिवसेना से हाथ मिलाने के दाग का खतरा है. इसके अलावा कांग्रेस के लिए गठबंधन की राजनीति बहुत ज्यादा सूट नहीं करती है. यही वजह है कि महाराष्ट्र सरकार में हिस्सेदारी के ऑफर के बावजूद कांग्रेस कशमकश में फंसी हुई है.
बता दें कि महाराष्ट्र में पहले बीजेपी और बाद में शिवसेना तय समय में सरकार बनाने का दावा पेश नहीं कर सके. महाराष्ट्र में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की सोमवार को हुई मैराथन बैठक का कोई नतीजा नहीं निकला सका है. महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर संकट बरकरार है. जबकि, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने खुद फोन कर सोनिया गांधी से सरकार बनाने के लिए समर्थन मांगा, लेकिन कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने इसे महज ‘शिष्टाचार वार्ता’ का नाम दिया.
वहीं, कांग्रेस का मानना है कि महाराष्ट्र सरकार में देरी उनकी तरफ से नहीं, बल्कि एनसीपी चीफ शरद पवार की ओर से हो रही है. इसके पीछे कांग्रेस की थ्योरी है कि शरद पवार चाहते हैं कि दोनों पार्टियों शिवसेना और एनसीपी को ढाई-ढाई साल सीएम पद मिले. यानी सीएम का पद रोटेशनल हो. वहीं, शिवसेना अभी भी आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाना चाहती है.
अल्पसंख्यक वोट खिसकने का खतरा
कांग्रेस शिवसेना के साथ खुलकर सामने नहीं आ रही है. वह शिवसेना के बजाय एनसीपी के जरिए बात कर रही है. महाराष्ट्र में गठबंधन की जिम्मेदारी कांग्रेस ने शरद पवार के कंधों पर डाल दी है. दरअसल कांग्रेस की राजनीति की चिंता है कि शिवसेना से साथ जाने पर अल्पसंख्यक मत कहीं नाराज न हो जाए, क्योंकि शिवसेना शुरू से ही उग्र हिंदुत्व की राजनीति करती रही है. कांग्रेस के केंद्र में धर्मनिर्पेक्षता गठजोड़ का उसका सपना अधूरा रह जाएगा. इस तरह से कांग्रेस को यह डर सता रहा है कि शिवसेना का हाथ मिलाना गले की फांस बन सकता है.
उत्तर भारतीय वोट का खतरा
कांग्रेस की चिंता है कि महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ हाथ मिलाने पर कहीं उत्तर भारतीय मतदात नाराज न हो जाए. शिवसेना महाराष्ट्र में उत्तर भारतीयों को निशाना बनाती रही है. ऐसे में शिवसेना के साथ सरकार बनाने पर उत्तर भारतीय राज्यों में कांग्रेस को अपने वोट छिटकने का खतरा है. इसीलिए कांग्रेस कशमकश में फंसी हुई है.
बाल ठाकरे और सोनिया गांधी के बीच छत्तीस का आंकड़ा
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के विदेश मूल का मुद्दा बनाने में शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे की अहम भूमिका रही है. इतना ही नहीं सोनिया गांधी 1999 से लेकर अभी तक शिवसेना नेताओं से मिलने से परहेज ही करती रही हैं. पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपनी पुस्तक ‘द कोएलिशन इयर्स 1996 टू 2012 में लिखा है कि 2012 में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान उन्होंने बाल ठाकरे से मुलाकात करने पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी नाराज हो गई थीं. ऐसे में सोनिया गांधी किस तरह से शिवसेना से हाथ मिलाए इस लेकर असंमजस बना हुआ है.
महाराष्ट्र के दिग्गज कांग्रेसी नहीं चाहते गठबंधन
महाराष्ट्र के कई दिग्गज कांग्रेसी नेता शिवसेना के साथ गठबंधन करने पर सहमत नहीं है. उन्हें लगता है कि एनसीपी और शिवसेना की सरकार बनाने में कांग्रेस मदद करती है तो दोनों क्षेत्रीय पार्टियां महाराष्ट्र में मजबूत हो जाएंगी. ऐसे में कांग्रेस की स्थिति उत्तर प्रदेश जैसी हो जाएगी. कांग्रेस ने यूपी में सपा और बसपा को समर्थन दिया था. इसका नतीजा है कि अभी तक कांग्रेस यूपी में वापसी नहीं कर सकी है.