संस्कृति विवि में होटल मैनेजमेंट विभाग की seminar

मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय के होटल मैनेजमैंट विभाग द्वारा आयोजित एक seminar में जेडब्लू मैरियट होटल आगरा (JW Marriott Hotel Agra)  से आईं आपरेशन मैनेजर कुमारी शीतल सचदेवा ने कहा कि आतिथ्य सत्कार की अवधारणा हिंदू सिद्धांतों में गहराई से जुड़ी हुई हैं और यहां अतिथियों को आदरणीय माना जाता है। भारत की तरह कोई अन्य देश या अन्य सिद्धान्त किसी भी ‘अतिथि’ को ऐसा महत्व और सत्कार नहीं देते हैं, इसलिए हमें अपनी अद्भुत परंपरा, विश्वास और व्यवहार में निपुण होना चाहिए।

seminar में उन्होंने कहा होटल और पर्यटन का व्यवसाय एक अतिथि की देखभाल जैसे उसके स्वागत, मान और अहमियत पर निर्भर करेगा। ऐसा इसलिए किया जाता है जिससे कि अतिथि जल्द ही वापस लौटें। एक अतिथि और मेजबान के बीच के रिश्ते की जटिलता को समझने के लिए यह जरूरी है कि आप स्वयं को आतिथ्य नैतिकता के लिए शिक्षित करें, आतिथ्य प्रबंधन को आगे बढ़ाने के लिए अनुशासन आवश्यक होता है।

semina में विवि के होटल मैनेजमैंट विभाग के डीन एमके शर्मा ने कहा कि क्या यह चिंता का विषय है, कि लोगों ने ‘आतिथ्य प्रबंधन’ और ‘होटल प्रबंधन’ शब्द का प्रयोग शुरू कर दिया है, हालांकि इन दोनों का मतलब अलग है। हालांकि दोनों के अनुशासन के अध्ययन की शाखाएं एक ही हैं, होटल प्रबंधन एक अस्थायी आवास से संबंधित स्थापना के कार्यों के प्रबंधन के लिए प्रतिबंधित है, जबकि आतिथ्य एक व्यापक शब्द है जिसमें उद्योग जैसे होटल और सम्मेलन प्रबंधन, बिक्री, व्यवसाय विकास, आदि तथ्य शामिल हैं।

सेमिनार के बाद कुमारी सचदेवा ने विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों और संस्कृति विश्वविद्यालय की आधुनिक प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों और कैंपस का अवलोकन कर कहा कि ऐसा सुंदर वातावरण बच्चों को पढ़ने के लिए मिलेगा तो वो दूना मन लगा कर अपना अध्ययन कर सकते हैं। इस मौके पर उन्होंने एक पोस्टर प्रतियोगिता का भी उद्घाटन किया।

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