जानें राम जन्मभूमि न्यास के बारे में जिसे SC ने सौंपी है अयोध्या की विवादित जमीन

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर शनिवार को सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आ चुका है. अयोध्या में यह विवाद सदियों से चला आ रहा था. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई में पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने फैसला सुनाते हुए विवादित जमीन राम जन्मभूमि न्यास को सौंप दी है. जबकि मुस्लिम पक्ष को अलग स्थान पर जगह देने के लिए कहा गया है. यानी सुन्नी वफ्फ बोर्ड को कोर्ट ने अयोध्या में ही अलग जगह जमीन देने का आदेश दिया है.
क्या है रामजन्मभूमि न्यास
राम जन्मभूमि न्यास अयोध्या में राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण को बढ़ावा देने और उसकी देखरेख करने के लिए एक ट्रस्ट के रूप में गठित किया गया एक संगठन है. इसकी स्थापना विश्व हिंदू परिषद के सदस्यों के द्वारा 25 जनवरी 1993 को एक स्वतंत्र ट्रस्ट के तहत की गई थी. रामचंद्र दास परमहंस (1913-2003) रामजन्मभूमि न्यास के प्रमुख थे. कारसेवकपुरम में मंदिर निर्माण के लिए चलने वाली वर्कशॉप का संचालन इसी के देखरेख में होता रहा है.
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2010 के फैसले में भी था राम जन्मभूमि का हिस्सा
30 सितंबर, 2010 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अयोध्या के विवादित स्थल को राम जन्मभूमि करार दिया था. हाई कोर्ट ने 2.77 एकड़ जमीन का बंटवारा कर दिया गया था. कोर्ट ने सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्माही अखाड़ा और रामलला के बीच जमीन बराबर बांटने का आदेश दिया था.
1 जुलाई 1989 को कहा गया- राम इस संपत्ति के मालिक
1989 के आम चुनाव से पहले विश्व हिंदू परिषद के एक नेता और रिटायर्ड जज देवकी नंदन अग्रवाल ने 1 जुलाई को भगवान राम के मित्र के रूप में पांचवां दावा फैजाबाद की अदालत में दायर किया था. इस दावे में स्वीकार किया गया था कि 23 दिसंबर 1949 को राम चबूतरे की मूर्तियां मस्जिद के अंदर रखी गई थीं. इसके साथ ही यह स्पष्ट दावा किया गया कि जन्म स्थान और भगवान राम दोनों पूज्य हैं और वही इस संपत्ति के मालिक भी हैं.
बाबर का किया गया था उल्लेख
आपको बता दें कि इस मुकदमे में मुख्य तौर पर इस बात का उल्लेख किया गया था कि बाबर ने एक पुराना राम मंदिर तोड़कर वहां एक मस्जिद बनवाई थी . दावे के समर्थन में अनेक इतिहासकारों, सरकारी गजेटियर्स और पुरातात्विक साक्ष्यों का हवाला भी दिया गया था.
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इसी मुकदमे में हुई थी विशाल मंदिर की बात
इसी मुकदमे में पहली बार कहा गया था कि राम जन्म भूमि न्यास इस स्थान पर एक विशाल मंदिर बनाना चाहता है. इस दावे में राम जन्म भूमि न्यास को भी प्रतिवादी बनाया गया था. अशोक सिंघल इस न्यास के मुख्य पदाधिकारी थे. इस तरह पहली बार विश्व हिंदू परिषद भी परोक्ष रूप से पक्षकार बना.
मुस्लिम पक्ष को मिलेगी 5 एकड़ जमीन
सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा है कि विवादित जमीन पर रामजन्मभूमि न्यास का हक है. जबकि मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही 5 एकड़ जमीन किसी दूसरी जगह दी जाएगी. कोर्ट ने कहा कि केंद्र या राज्य सरकार अयोध्या में उचित स्थान पर मस्जिद बनाने को जमीन दे.