इतिहास, श्लोकों के संग 1045 Pages और एक ऐतिहासिक फैसला

नई द‍िल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद पर 1045 पन्नों में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने 929 पन्नों में अपना निर्णय सुनाया है। इसके अलावा बाकी पन्नें भी इसमें जुड़े हुए हैं। एक किताब जैसे दिखने वाले इस आदेश में इतिहास से लेकर सभी पक्षों की दलील विस्तृत रूप से शामिल किया गया है। इसकी भूमिका में दो पक्षों के बीच अयोध्या की 1500 गज जमीन का जिक्र किया गया है।

फैसले की भूमिका में 1950 में अदालत द्वारा आयुक्त के पत्र को भी शामिल किया गया है। इस पत्र में शिवशंकर लाल ने कोर्ट के आदेश का पालन करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि आदेश के बाद वह पहली 16 अप्रैल 1950 को विवादित स्थल पर गए और इसके बाद 30 अप्रैल 1950 को यहां का दौरा किया। शिवशंकर लाल इन दोनों दौरों का विस्तृत वर्णन किया है।

यही नहीं अदालत ने भारतीय पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट को भी आदेश में शामिल किया गया है। इसके अलावा एक वाद में अपना दावा रखने के लिए संस्कृत के श्लोकों का भी जिक्र गया है।

13वीं शताब्दी ईसा पूर्व तक के म‍िले अवशेष सुप्रीम कोर्ट के फैसले में अहम रहे। एएसआई रिपोर्ट में भी कहा गया कि खुदाई में 13वीं शताब्दी ईसा पूर्व तक के अवशेष मिले हैं। जो खंडहर खुदाई में मिले, उनमें इतिहास के कुषाण और शुंग काल से लेकर गुप्त काल और प्रारंभिक मध्य युग तक के अवशेष हैं।

गोलाकार मंदिर सातवीं से दशवीं शताब्दी के बीच का माना गया, इसके बाद प्राम्भिक मध्य युग 11-12वीं शताब्दी की 50 मीटर उत्तर -दक्षिण इमारत का ढांचा मिला जो ज़्यादा समय तक नहीं रहा। इस ढांचे के ऊपर एक और विशाल इमारत का ढांचा है जिसकी फर्श तीन बार में बनी।

इसी तरह के स्कंद पुराण के भी उल्लेख ने सुप्रीम कोर्ट की काफी सहायता की है ।
– एजेंसी

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