योगी सरकार ने 7 PPS अफसरों को जबरन रिटायरमेंट दिया

लखनऊ। भ्रष्टाचार के खिलाफ यूपी सरकार की कार्यवाही लगातार जारी है। योगी सरकार ने भ्रष्टाचार के आरोपों में एक बार फिर 7 PPS अफसरों को जबरन रिटायरमेंट दे दिया है। भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत योगी सरकार पहले भी कई अधिकारियों को जबरन रिटायर कर चुकी है।
योगी सरकार की तरफ से की गई इस कार्यवाही में अरुण कुमार (सहायक सेनानायक 15 वीं वाहिनी पीएसी आगरा), विनोद कुमार गुप्ता (पुलिस उपाधीक्षक जनपद फैजाबाद) , नरेंद्र सिंह राणा (पुलिस उपाधीक्षक जनपद आगरा) रतन कुमार यादव (सहायक सेनानायक पीएसी झांसी), तेजवीर सिंह यादव (27 वीं वाहिनी पीएसी सीतापुर), संतोष कुमार सिंह (मंडल अधिकारी मुरादाबाद) और तनवीर अहमद खां शामिल हैं। भ्रष्टाचार के आरोप में प्रमुख वन संरक्षक पवन कुमार भी हटाए गए हैं।
भ्रष्ट अधिकारियों की लिस्ट तैयार
बता दें कि योगी सरकार ने प्रदेश के भ्रष्ट अधिकारियों की लिस्ट तैयार की है। इस लिस्ट में लगभग छह सौ अधिकारियों के नाम हैं। बताया जा रहा है कि चार सौ भ्रष्ट अधिकारियों को सरकार ने चेतावनी जारी की है और उनके खिलाफ कार्यवाही की तैयारी की जा रही है। गृह विभाग की समीक्षा के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ ने भ्रष्ट और नाकारा पुलिसकर्मियों को जबरन सेवानिवृत्ति देने के निर्देश दिए थे। उसके बाद एडीजी स्थापना पीयूष आनन्द ने सभी इकाइयों और जिलों में बनाई गई स्क्रीनिंग कमेटी की रिपोर्ट तलब की। उन पुलिसवालों की छंटनी की जाएगी, जो 31 मार्च 2019 को 50 वर्ष की आयु पार कर चुके हैं।
एडीजी स्थापना पीयूष आनन्द ने पुलिस की सभी इकाइयों के प्रमुखों, सभी आईजी रेंज और एडीजी जोन को ऐसे नाकारा पुलिसवालों की सूची 30 जून तक भेजने के लिए पत्र लिखा था। बीजेपी सरकार के सत्ता संभालने के बाद ही पुलिस समेत सभी विभागों में 50 पार के ऐसे लोगों की छंटनी का आदेश दिया गया था, जिनका रेकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है।
गृह विभाग की समीक्षा के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ ने भ्रष्ट और नाकारा पुलिसकर्मियों को जबरन सेवानिवृत्ति देने के निर्देश दिए थे। उसके बाद एडीजी स्थापना पीयूष आनन्द ने सभी इकाइयों और जिलों में बनाई गई स्क्रीनिंग कमेटी की रिपोर्ट तलब की।
-एजेंसियां

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