अब भारतीय टीम में होंगे बड़े बदलाव, होंगे ये खिलाड़ी बाहर

कल से पहले भारतीय टीम को विश्वकप का प्रबल दावेदार माना जा रहा था और ऐसा होता भी क्यों नहीं. विश्वकप में भारतीय टीम का शानदार प्रदर्शन रहा अपने 9 लीग मैच में से टीम को सिर्फ एक में हार मिली थी और वो टॉप पर थी.
लेकिन सेमीफ़ाइनल में मिली करारी हार ने भारतीय टीम की एक कमजोरी को जगजाहिर कर दिया. जी हां, ये परेशानी वही है जिससे पार पाने के लिए टीम इंडिया पिछले 2-3 साल से लगातार जूझ रही थी. इस विश्वकप में भी टीम इसी परेशानी से जूझती रही और आख़िर में उसने ही भारतीय टीम को ले डूबा. बात हो रही है मध्य क्रम के बल्लेबाज़ी की. टीम का टॉप ऑर्डर पूरे विश्वकप में चला और ज़्यादातर मैच भारत ने उसी बदौलत जीते. लेकिन कल टॉप के तीन बल्लेबाज़ फ्लॉप हुए और मध्य क्रम के ऊपर सारा दारोमदार आ गया. लेकिन, निर्णायक मौक़े पर मिडिल ऑर्डर दग़ा दे गया.
अब मिडिल ऑर्डर में बड़े बदलावों और सुधार के कयास फिर से शुरू हो गए हैं. इसके साथ ही विश्वकप जैसे अहम टूर्नामेंट में जिन खिलाड़ियों को मौक़ा दिया गया और जो अपने आप को साबित करने में नाकाम रहे, उनका टीम से पत्ता साफ हो जाने की भी बात कही जा रही है. ऐसे में दिनेश कार्तिक और केदार जाधव का टीम से बाहर होना लगभग तय माना जा रहा है.
अगले साल होने वाले टी20 विश्वकप और हाल के एकदिवसीय मैचों को देखते हुए ही भारतीय टीम में बदलाव किए जाएंगे. जब महेंद्र सिंह धोनी ने टीम की कप्तानी संभाली थी तो वनडे के लिए टीम को तैयार करने के लिए कम से कम दो साल पहले से तैयारी शुरू की थी. वहीं टी20 के लिए क़रीब 18 महीने लिए थे. भारत के लिए अगला बड़ा टूर्नामेंट अगले साल ऑस्ट्रेलिया में हो रहा टी20 विश्वकप होगा.
एमएसके प्रसाद की अगुवाई वाली चयन समिति बीसीसीआई के चुनाव होने तक ये कार्यभार संभालेगी. लेकिन उम्मीद है कि ये अगले 14 महीनों के लिए छोटे प्रारूप के क्रिकेट पर ध्यान देगी.
केदार जाधव और दिनेश कार्तिक जैसे खिलाड़ियों के साथ एक कमजोर मिडिल ऑर्डर को लेकर चलना टीम की बड़ी चूक माना जा रहा है. टीम को इसका खामियाजा विश्वकप के सेमीफ़ाइनल में भुगतना पड़ा. इतना ही नहीं नॉकआउट मुक़ाबले में टॉप ऑर्डर रोहित शर्मा, केएल राहुल और विराट कोहली का एक ही दिन इस तरह का प्रदर्शन बहुत बुरा था.
2017 आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के फ़ाइनल में पाकिस्तान के हाथो मिली हार के बाद भारतीय वनडे टीम में कोच रवि शास्त्री और कप्तान विराट कोहली ने बदलाव किया था. टीम में स्पिनरों को शामिल किया गया था और इन दोनों ने द्विपक्षीय मैचों में भारत को सफलता दिलाई. हालांकि इन दोनों का विश्वकप में प्रदर्शन कुछ ख़ास नहीं रहा.
ऐसा नहीं है कि भारत के पास सिर्फ विश्वकप में प्लान बी नहीं था बल्कि पिछले दो साल से टीम के पास प्लान बी नहीं है और ये तब तक मायने नहीं रखता था जब तक रोहित एक के बाद एक शतक बना रहे थे.
मनीष पांडे और श्रेयस अय्यर जैसे खिलाड़ियों को मौक़ा दिए बिना विश्वकप से बाहर कर दिया गया. युवा खिलाड़ी शुभमन गिल जो शानदार प्रदर्शन कर सकते थे उनको विश्वकप से पहले खेले गए न्यूज़ीलैंड टूर में सिर्फ एक मैच खिलाकर बाहर कर दिया गया.
मौजूदा विश्वकप में दिनेश कार्तिक और केदार जाधव जैसे खिलाड़ी टीम के लिए सबक थे. लेकिन इसके बाद टीम प्रबंधन निश्चित रूप से ग़लत साबित हो गया क्योंकि उन्होंने केदार जाधव और दिनेश कार्तिक जैसे खिलाड़ियों को टीम में जगह दी. वहीं धोनी के खेल को सफल बनाने के लिए दूसरे छोर पर जडेजा और पांड्या जैसे खिलाड़ियों की जरूरत है. जो ‘बिट्स और टुकड़ों’ (किस्तों में परफॉर्म करते हैं) से कहीं ज़्यादा है.
हालांकि विश्वकप टी20 से पहले कप्तान विराट कोहली ने ये स्पष्ट कर दिया है कि टीम में बदलाव और सुधार होगा.