‘कांग्रेस मुक्त भारत’: अमेठी के बाद BJP की नजर अब रायबरेली पर

लखनऊ। यूपी में ‘कांग्रेस मुक्त’ अभियान में अमेठी का किला धराशायी करने से उत्साहित BJP अब ‘मिशन रायबरेली’ चलाने की तैयारी में है। पार्टी ने लोकसभा चुनाव खत्म होने के साथ ही अपना टारगेट सेट कर लिया है। BJP की तैयारी 2024 के लोकसभा चुनाव की है। वह यह मानकर चल रही है कि उसमें अमेठी की तरह रायबरेली का इतिहास बदलने की कूवत है।
यह वही रायबरेली है, जहां से 1977 में पूर्व पीएम इंदिरा गांधी को जनता पार्टी के राजनारायण ने शिकस्त दी थी।
BJP चुनाव संचालन समिति के प्रभारी पशुपति वाजपेयी कहते हैं, ‘हमें चुनावी तैयारी के लिए सिर्फ एक महीना मिला था। अब पूरा पांच साल मिल गया है। गणित और संगठन हमारे साथ है। सभी 16 मंडलों में हमने नेटवर्क को और मजबूत करना शुरू कर दिया है। पांच साल में नतीजे सामने होंगे।’
गांव-गांव विकास, हर बूथ पर कार्यकर्ता
BJP के प्रदेश महामंत्री गोविंद नारायण शुक्ल कहते हैं, ‘अमेठी की तरह हमने रायबरेली में भी गांव-गांव विकास और हर बूथ पर कार्यकर्ता तैनात करने का अभियान चलाया था।’ वहीं, पशुपति वाजपेयी बताते हैं कि बीजेपी ने यहां 73 तरह के कार्यक्रम किए थे, जिससे हर गांव में नेटवर्क हो गया है। कहते हैं, ‘1883 बूथों पर पूरा संगठन तैयार है। हमें दो मंडलों, सरैनी और रोनियां में सबसे ज्यादा वोट मिले। दूसरी ओर कांग्रेस के पास 25 फीसदी बूथों पर एजेंट तक नहीं थे। किसी एक राज्यसभा सांसद का पैसा यहां लगाने की भी योजना है ताकि लोगों को काम होता दिखे। प्रदेश सरकार ने भी बिजली और किसानों की समस्याओं को दूर करने का अभियान चला रखा है।’
दिनेश पर इसलिए दांव
BJP की रणनीति है कि अमेठी की तरह वह जिसे रायबरेली का चेहरा बनाए, वह यहां लोगों के हर दुख-दर्द में खड़ा रहे। इस रणनीति के तहत उसने एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह को अपने पाले में किया है।
कांग्रेस का चेहरा रहे नेता को रायबरेली की जिम्मेदारी
दिनेश प्रताप एक समय रायबरेली में कांग्रेस का बड़ा चेहरा माने जाते थे। रायबरेली की पांच विधानसभा सीटों में से दो कांग्रेस के पास हैं, जिनमें से एक से विधायक राकेश प्रताप सिंह, दिनेश के ही सगे भाई हैं। दिनेश सिंह के दूसरे भाई अवधेश सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। आंकड़ों में देखें तो अब केवल रायबरेली सदर की सीट ही कांग्रेस के पास बच गई है। इसके बाद ही BJP ने दिनेश प्रताप को अपना प्रत्याशी और चेहरा बना लिया। वह भले ही चुनाव हार गए, पर यहां पंचायत से लेकर बूथ तक अपनी टीम तैयार करने में अब भी जुटे हुए हैं। उनका कहना है कि वह जब तक रायबरेली को कांग्रेस मुक्त नहीं कर लेते, चैन से नहीं बैठेंगे।
गणित भी साथ में
1996 और 1998 में दो बार रायबरेली सीट जीत सकी है BJP। दोनों बार सामने गांधी परिवार से कोई नहीं था
33 से 36 फीसदी वोट पाकर ही बीजेपी के अशोक सिंह दोनों बार संसद पहुंच गए
3.65 लाख वोट मिले हैं इस बार दिनेश प्रताप सिंह को। 38.36 फीसदी है मत प्रतिशत। BJP को रायबरेली में इतने वोट कभी नहीं मिले
1100 करोड़ रुपये की योजनाएं शुरू की थीं पीएम ने 2018 में
-एजेंसियां

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