फुरकान 16 साल का था. 12वीं में पढ़ता था. घंटों मोबाइल पर गेम खेलता रहता. सुबह, शाम, दिन, रात, जब वक़्त मिले तब बस गेम गेम गेम. PUBG का खास चाव था उसे. एक दिन गेम खेलते-खेलते वो चीखने लगे. बोला- देख, उसने मुझे मार दिया. फिर एकाएक उसकी मौत हो गई. इतनी एकाएक कि अभी ज़िंदा है और अभी मर गया. परिवार का कहना है, PUBG खेलने की वजह से फुरकान की मौत हुई.
क्या हुआ था उस दिन?फुरकान के पिता हारून राशिद. मध्य प्रदेश के नीमच में रहते हैं. नसीराबाद में रहने वाले उनके भाई के बेटे की शादी थी. पूरा परिवार यहां जमा था. 25 को सगाई का प्रोग्राम निपट गया. आगे शादी थी. 26 की रात को फुरकान ने बाकी दिनों की तरह PUBG खेलना चालू किया. वो सुबह 2 बजे तक लगातार खेलता रहा. फिर सो गया. अगले दिन, यानी 27 मई को फिर सुबह जगा. खाना खाया और फिर दोपहर 12 बजे उसने फिर से PUBG खेलना शुरू कर दिया. शाम 6 बजे तक लगातार खेलता ही रहा. सब इधर-उधर कामों में लगे थे.
घरवाले बताते हैं, वो इतना बस गया गेम में कि सच और झूठ का फर्क नहीं रहा. गेम में उसके खिलाड़ी के साथ कुछ होता तो उसे लगता ये उसके साथ ही हो रहा है. गेम के उसके प्लेयर की आइडेंटिटी और फुरकान का वजूद, उसके दिमाग में कोई लकीर नहीं रही. सब गुंथ गया. फिर एक स्टेज आई जब गेम के अंदर PUBG में उसके खिलाड़ी पर धमाका हुआ. फुरकान अपने खिलाड़ी को मरता देखकर जोर-जोर से चिल्लाने लगा. उसकी छोटी बहन फिज़ा उसके साथ थी. उसका कहना है, फुरकान एकाएक बहुत घबरा गया था. चिल्लाते हुए कुछ मिनट बीते थे कि एकाएक उसकी जान निकल गई शरीर से. घरवाले फटाफट उसे डॉक्टर के पास ले गए. उन्होंने बताया, फुरकान नहीं रहा.

डॉक्टर का क्या कहना है?नीमच में इंडिया टुडे के पत्रकार आकाश चौहान ने दी है ये खबर. जिन डॉक्टर अशोक जैन के पास फुरकान को ले जाया गया था, उससे बात की आकाश ने. डॉक्टर का कहना है कि कार्डियक अरेस्ट के कारण फुरकान की मौत हुई. डॉक्टर के मुताबिक-
इस तरह के गेम में एक्साइटमेंट बहुत हाई-लेवल पर पहुंच जाता है. बच्चा उस करेक्टर के साथ इतना जुड़ जाता है कि उसे लगता है वो घटना उसके साथ हो रही है. ऐसी हालत में कार्डियक अरेस्ट हो सकता है.
फुरकान की जान कैसे गई, क्या बता रहा है परिवार?फुरकान के पिता हारून कहते हैं-
करीब डेढ़ साल पहले फुरकान को PUBG खेलने की आदत लगी. वो दो-तीन घंटे लगातार गेम खेलता रहता. मैं मना करता, लेकिन वो मानता नहीं. जुनून था उसको गेम का. कान में हेडफोन लगाकर गेम खेलते-खेलते जोरों से चिल्लाता- ब्लास्ट हो जाएगा, उसको मार दो, इसको मार दो. सगाई वाले दिन लगातार छह घंटे यही गेम खेलता रहा वो. उसकी छोटी बहन साथ ही थी उसकी. खेलते-खेलते अचानक चिल्लाने लगा. दो मिनट में लाल पड़ गया उसका शरीर. डॉक्टर के पास लेकर गए उसको, लेकिन वो बचा ही नहीं था.

फुरकान कीछोटी बहन फिज़ा के पास भी उस दिन की यादें हैं. जब उसने भाई को आखिरी बार ज़िंदा देखा. जब उसने बात ही बात में उसे दम तोड़ते देखा-
लगातार छह घंटे से गेम खेल रहा था वो. मैं नीचे ही बैठी थी. वो लेटकर गेम खेल रहा था. अचानक जोर से चिल्लाने लगा. कह रहा था, ‘अयान तूने मुझे हरवा दिया तुझे खेलना नहीं आता अब मैं तेरे साथ नहीं खेलूंगा, देख उसने मुझे मार दिया.’ इसके बाद ब्लास्ट हुआ बोलकर उसने हेडफोन निकाल दिया और मर गया. वो तो बीमार भी नहीं था. इस गेम के बिना वो रहता नहीं था. गेम डिलीट कर दो, तो खाना-पीना छोड़ देता था. ये गेम बंद करवा दो.
बच्चों को मौत का ठीक-ठीक मतलब भी नहीं पता होता. उस बच्ची ने अपने भाई को बस यूं ही, एकदम एकाएक मरते हुए देखा है. वो कितने सदमे में होगी, ये बस महसूस करने की बात है. फुरकान की फैमिली PUBG बंद करवाना चाहती है. उन्हें लगता है, इसी ने उनके बच्चे की जान ली. अच्छे-खासे स्वस्थ बच्चे का एकाएक मिनटों में गुज़र जाना, वो इसे समझ नहीं पा रहे. स्वीकार नहीं कर पा रहे. न ऐक्सिडेंट, न बीमारी, न कोई और दुर्घटना. तो उनकी सारी इंद्रिया PUBG को ही कारण मान रही हैं. हम नहीं जानते कि वो यहां सही हैं कि नहीं. मगर ये तो है ही कि फुरकान को इस गेम की लत थी और यही खेलने के दौरान उसकी मौत हुई.