सरकारी ‘महायोजना’ को पलीता लगा रहा है MVDA, बेखौफ अवैध निर्माण कार्य जारी

सरकारी 'महायोजना' को पलीता लगा रहा है MVDA, बेखौफ अवैध निर्माण कार्य जारी
सरकारी ‘महायोजना’ को पलीता लगा रहा है MVDA, बेखौफ अवैध निर्माण कार्य जारी

मथुरा। जिस विभाग पर भगवान श्रीकृष्‍ण की पावन जन्‍मस्‍थली, लीलास्‍थली और ब्रज वसुंधरा के विकास की जिम्‍मेदारी है, वही विभाग एक लंबे समय से उसका विनाश करने में लगा है।
जी हां, MVDA (मथुरा-वृंदावन ‘विकास प्राधिकरण) को संभवत: इसीलिए अब ‘विनाश प्राधिकरण’ भी कहा जाने लगा है।
प्रदेश सरकार की इस डेवलपमेंट अथॉरिटी के अधिकारी व कर्मचारी पहले तो निजी हित साधने के चक्‍कर में महत्‍वपूर्ण स्‍थानों पर अवैध निर्माण कार्य होते देखकर भी अपने आंख एवं कान बंद किए रहते हैं और जब निर्माण कार्य पूरा हो जाता है तब जांच की आड़ लेकर सारे मामले की लीपापोती करने में जुट जाते हैं।
ताजा मामला नेशनल हाईवे नंबर 2 से सटी उस जमीन पर चल रहे अवैध निर्माण कार्य का है जो सरकारी ‘महायोजना’ के लिए आवंटित है और वहां किसी निर्माण कार्य का नक्‍शा तक MVDA पास नहीं कर सकता।
इस अवैध निर्माण की बाकायदा लिखित शिकायत नगला शिवजी निवासी प्रशांत चौधरी ने गत 28 मई को MVDA (मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण) के सचिव को पत्र लिखकर की है, बावजूद इसके फिलहाल निर्माण कार्य लगातार जारी है।
प्रशांत चौधरी के अनुसार नेशनल हाईवे से सटे ग्राम महोली के खसरा नंबर 222 व उसके आसपास की जमीन पर किसी प्रभावशाली व्‍यक्‍ति द्वारा यह अवैध निर्माण कार्य खुलेआम कराया जा रहा है किंतु आजतक वहां MVDA के किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी ने झांकने की भी जरूरत नहीं समझी।
प्रशांत चौधरी ने अपने शिकायती पत्र के साथ अवैध निर्माण कार्य के चित्र संलग्‍न करते हुए लिखा है कि जिस जमीन पर यह निर्माण कार्य कराया जा रहा है वह ग्राम सभा की भूमि है और सरकार द्वारा ब्रज के विकास हेतु शुरू की गई ‘महायोजना’ का हिस्‍सा है।
प्रशांत चौधरी ने सचिव MVDA (मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण) को यह जानकारी भी दी है कि जब कोई इस निजी अवैध निर्माण कार्य के बारे में जानकारी करने जाता है तो निर्माण कराने वाले लोग उसे यह कहकर गुमराह करते हैं कि उनके द्वारा कराया जा रहा निर्माण कार्य सरकार की ‘महायोजना’ के तहत ही हो रहा है।
प्रशांत चौधरी ने अपने शिकायती पत्र की प्रतियां प्रदेश के मुख्‍यमंत्री, अध्‍यक्ष और उपाध्‍यक्ष मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण, आयुक्‍त आगरा मंडल सहित मुख्‍य सचिव आवास-विकास उत्तर प्रदेश को भी भेजी हैं।
इस संबंध में MVDA से जानकारी करने की कोशिश की गई तो मात्र इतना बताया गया कि उपाध्‍यक्ष मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण ने मामले की जांच सचिव विकास प्राधिकरण को सौंप दी है लिहाजा जांच के बाद कोई कदम उठाया जाएगा।
दूसरी ओर विकास प्राधिकरण के ही सूत्र बताते हैं कि जिस प्रभावशाली व्‍यक्‍ति द्वारा इस बेशकीमती सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण कार्य बेखौफ होकर कराया जा रहा है, उसकी प्राधिकरण में तूती बोलती है। प्राधिकरण का कोई अधिकारी या कर्मचारी उसकी खिलाफत करने का दुस्‍साहस नहीं कर सकता।
गौरतलब है कि MVDA (मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण) के उपाध्‍यक्ष नगेन्‍द्र प्रताप की नौकरी का एक बड़ा समय मथुरा में कटा है। वह यहां एसडीएम भी रह चुके हैं। यहां उनके कई पूंजीपतियों ने निकट संबंध हैं और उनकी कार्यशैली से पता भी लगता है कि वह पुराने संबंधों को निभाने से पीछे नहीं हटते।
नगेन्‍द्र प्रताप फिलहाल एक ओर जहां मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के उपाध्‍यक्ष हैं वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश तीर्थ विकास परिषद् के सीईओ भी हैं।
उत्तर प्रदेश तीर्थ विकास परिषद् द्वारा ब्रज में कराए जाने वाले सभी विकास कार्यों की जिम्‍मेदारी भी मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के पास है।
यानी नगेन्‍द्र प्रताप ऐसे दो-दो महत्‍वपूर्ण सरकारी पदों पर काबिज हैं जो एक-दूसरे के पूरक हैं।
ऐसे में सरकारी ‘महायोजना’ की जमीन पर लंबा-चौड़ा अवैध निर्माण कार्य हो जाना और शिकायत किए जाने पर मात्र जांच के आदेश देकर लीपापोती करने की कोशिश करना स्‍पष्‍ट करता है कि ‘महायोजना’ की जमीन पर चल रहे निअवैध र्माण कार्य को विकास प्राधिकरण की मौन स्‍वीकृति प्राप्‍त है और इसीलिए उस पर बेखौफ निर्माण कार्य किया जा रहा है।
वैसे यह न तो कोई अकेला मामला है और न पहला या अंतिम अवैध निर्माण कार्य। मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के कार्यों पर गौर फरमाया जाए तो पता लगेगा कि ‘योगी-राज’ में भी इस विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली वैसी ही बनी रही जैसी ‘पूर्ववर्ती’ सरकारों के समय रही थी।
पार्किंग की जगह छोड़े बिना कितने होटल, गैस्‍ट हाउस, मैरिज होम, मॉल आदि प्राधिकरण के क्षेत्र में खड़े हो गए लेकिन कोई न देखने वाला है और न सुनने वाला। जब कभी ऊपर से सख्‍ती बरती जाती है तो इसी प्रकार जांच की आड़ लेकर लीपापोती का खेल शुरू हो जाता है जिस प्रकार ‘महायोजना’ की जमीन पर चल रहे अवैध निर्माण कार्य को लेकर खेला जा रहा है।
मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण ने ब्रजभूमि का विकास कितना किया है, यह बताने की शायद आवश्‍यकता भी नहीं रही क्‍योंकि हर स्‍थानीय नागरिक इसे देख रहा है और जान भी चुका है।
रही बात अधिकारियों की तो इसमें कोई शक नहीं कि जो भी अधिकारी एकबार मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण का हिस्‍सा बन गया, उसका अपना विकास उसके निजी अनुमान से कहीं अधिक हो गया और इसीलिए उसकी हमेशा कोशिश रही कि नौकरी का अधिक से अधिक समय ब्रजभूमि में व्‍यतीत हो ताकि पांचों उंगलियां घी में व सिर भी कढ़ाई में डुबोकर तीन पीढ़ियों का मुकम्‍मल इंतजाम किया जा सके।
-सुरेन्‍द्र चतुर्वेदी

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