निशंक को पद संभालते ही सौंपा गया नई एजुकेशन पॉलिसी का ड्राफ्ट

नई दिल्ली। नए एचआरडी मिनिस्टर रमेश पोखरियाल निशंक के पद संभालने के कुछ देर बाद ही नई एजुकेशन पॉलिसी बना रही कमेटी ने इसका ड्राफ्ट सौंपा।
इस पॉलिसी का इंतजार करीब दो साल से हो रहा था और आखिरकार यह तैयार होकर मंत्रालय में आ गई है। पॉलिसी में सबसे ज्यादा फोकस भारतीय भाषाओं पर किया गया है। इसमें कहा गया है कि बच्चों को कम से कम क्लास पांच तक मातृभाषा में पढ़ाना चाहिए, साथ ही शुरू से बच्चों को तीन भारतीय भाषाओं का ज्ञान देना चाहिए। अगर विदेशी भाषा भी पढ़नी है तो यह चौथी भाषा के तौर पर हो सकती है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी शुरू से प्राइमरी की पढ़ाई मातृभाषा में ही कराने की मांग करता रहा है। संघ से संबंधित स्कूलों में ऐसा किया भी जाता है।
तीन भारतीय भाषाएं सीखें
नई एजुकेशन पॉलिसी में कहा गया है कि बच्चों को प्री-प्राइमरी से लेकर कम से कम पांचवीं तक और वैसे आठवीं तक मातृभाषा में ही पढ़ाना चाहिए। प्री-स्कूल और पहली क्लास में बच्चों को तीन भारतीय भाषाओं के बारे में भी पढ़ाना चाहिए जिसमें वह इन्हें बोलना सीखें और इनकी स्क्रिप्ट पहचाने और पढ़ें। तीसरी क्लास तक मातृभाषा में ही लिखें और उसके बाद दो और भारतीय भाषाएं लिखना भी शुरू करें। अगर कोई विदेशी भाषा भी पढ़ना और लिखना चाहे तो यह इन तीन भारतीय भाषाओं के अलावा चौथी भाषा के तौर पर पढ़ाई जाए।
प्राइवेट स्कूल की मनमानी पर भी लगाम
नई एजुकेशन पॉलिसी ड्राफ्ट में प्राइवेट स्कूलों की मनमाने तरीके से फीस बढा़ने पर भी लगाम लगाने के कहा गया है। इसमें कहा गया है कि स्कूलों को फीस तय करने की छूट होनी चाहिए लेकिन वह एक तय लिमिट तक ही फीस बढ़ा सकते हैं। इसके लिए महंगाई दर और दूसरे फैक्टर देख यह तय करना होगा कि वह कितने प्रतिशत तक फीस बढ़ा सकते हैं। हर तीन साल में राज्यों की स्कूल रेग्युलेटरी अथॉरिटी देखेगी कि इसमें क्या-क्या बदलाव करने हैं। फीस तय करने को लेकर राष्ट्रीय बाल आयोग भी पहले गाइडलाइन बना चुका है। उसमें भी यही कहा गया है कि महंगाई दर और दूसरे जरूरी फैक्टर के आधार पर तय हो कि प्राइवेट स्कूल कितनी फीस बढ़ा सकते हैं। बाल आयोग ने तो इसका उल्लंघन करने पर सख्त कार्यवाही के प्रावधान की भी सिफारिश की है।
बोर्ड एग्जाम का तनाव हो कम
पॉलिसी ड्राफ्ट में कहा गया है कि बच्चों में 10वीं और 12वीं बोर्ड एग्जाम का तनाव कम करना चाहिए। इसके लिए उन्हें मल्टिपल टाइम एग्जाम देने का विकल्प दिया जा सकता है। स्टूडेंट को जिस सेमिस्टर में लगता है कि वह जिस विषय में एग्जाम देने के लिए तैयार है उसका उस वक्त एग्जाम लिया जा सकता है। बाद में स्टूडेंट को लगता है कि वह उस विषय में और बेहतर करता है और उसे फिर से एग्जाम देने का विकल्प दिया जाना चाहिए।
राष्ट्रीय शिक्षा आयोग के गठन का प्रस्ताव
पॉलिसी ड्राफ्ट में राष्ट्रीय शिक्षा आयोग बनाने का भी प्रस्ताव है, जिसे प्रधानमंत्री हेड कर सकते हैं। साथ ही हायर एजुकेशन में अपने पसंद के विषय चुनने की ज्यादा छूट देने का भी प्रस्ताव है। इसमें लिबरल आर्ट में चार साल की बैचलर डिग्री शुरू करने का भी प्रस्ताव है। ड्राफ्ट में कहा गया है कि राइट टु एजुकेशन के तहत प्री प्राइमरी से लेकर 12 वीं तक सभी कवर हों। अभी यह पहली क्लास से आठवीं क्लास तक ही है। यह भी कहा गया है कि एजुकेशन पर ज्यादा फोकस करने के लिए मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय किया जाना चाहिए। सभी विषयों में भारत के योगदान को भी स्टूडेंट्स को पढ़ाना चाहिए।
-एजेंसियां

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