वर्ष 1907 में एक सम्मानित अमेरिकी वैज्ञानिक ‘डंकन मैकडॉगल एक अजीबोगरीब परीक्षण के जरिये यह जानना चाहा कि आत्मा का वजन कितना होता है।


इसके लिए डंकन मैकडॉगल तथा उसके चार साथियों की टीम ने 6 ऐसे मरीजो को ढूंढा जिनकी आने वाले कुछ समय मे मृत्यु होने वाली थी। ये सभी मरीज अलग अलग बीमारियों से पीड़ित थे।
जब मैकडॉगल को लगा कि मरीजो का अंतिम समय आ गया तब उसने सभी मरीजो के बेड को एक एक कर के एक वेट मशीन पर रखा और यह मशीन इतनी सटीक थी कि वजन के मामूली से मामूली अंतर को भी तुरंत भांप सकती थी।इस परीक्षण में मरीजो का वजन मरने से पहले तथा मरने के तुरंत बाद नापा जाना था।
जब पहले मरीज की मौत हुई तो वह मौजूद सभी डॉक्टर दौरान रह गए ,मरीज के मरने के ठीक बाद उसके वजन में लगभग 28ग्राम की कमी आयी। इसके बाद यह परीक्षण दूसरे मरीज पर किया गया पर इस बार वजन में आयी कमी पहले की अपेक्षा थोड़ी कम थी।


परन्तु जब तीसरे मरीज पर यह प्रयोग किया गया तो मैकडॉगल को लगा की उनका प्रयोग असफल हो गया क्योंकि उस मरीज के वजन में कई कमी नही आयी । परतु मौत के 1 मिनट बाद उसके वजन में लगभग 27 ग्राम की कमी आयी ।इस पर मैकडॉगल ने बहुत अटपटा बयान दिया कि वह मरीज काफी सुस्त था इसीलिए आत्मा को शरीर से निकलने में वक्त लगा।
तीसरे मरीज के भी वजन में कमी दर्ज की गई, चार मरीजो पर यह प्रयोग सफल रहा बाकी दो मरीजो पर मशीन में खराबी के कारण यह प्रयोग नही हो पाया।


सभी डॉक्टर की गणना की औसत के आधार पर मैकडॉगल इस नतीजे पर पँहुचा की मनुष्य की आत्मा का वजन लगभग 21 ग्राम होता है। मैकडॉगल की इस परीक्षण को लोग 21 ग्राम थेओरी के नाम से भी जानते हैं। इस अजीब प्रयोग पर हॉलीवुड में “21Gram ” नामक मूवी भी बनाई गई थी।
दोस्तो ये पोस्ट थोड़ी लंबी हो गयी पर आशा करता हुआ आप सबको अच्छी लगी होगी ।।