हिरोशिमा और नागासाकी हमले की ये बातें शायद ही किसी को पता हों।

1945 में जब हिरोशिमा और नागासाकी पर अमेरिका ने परमाणु बम गिराया था। यह बात जल्द ही पूरे विश्व मे आग की तरह फैल गयी,सब इसका विरोध कर रहे थे। आज मैं आपको इस हमले के बारे में कुछ ऐसी बाते बताऊंगा जो शायद आपकी हैरान कर दें।


पहला बम 6 अगस्त 1945 को तथा दूसरा 9 अगस्त 1945 को नागासाकी पर गिराया गया था, जिसका फैसला सिर्फ एक घण्टा पहले लिया गया था


हिरोशिमा पर गिराए गए बम का नाम “Little Boy” था। इसमें यूरेनियिम की मात्रा 65 किलो थी, लेकिन जो विस्फोट हुआ वह सिर्फ 0.7 ग्राम यूरेनियम की वजह से हुआ। यानि कि जिस पदार्थ की वजह से विस्फोट हुआ उसका वजन एक आलपिन या रुपये के नोट के बराबर भी नही था।


नागासाकी पर गिराए गए बम का नाम “Fat Man” था। इसमें 6.4 किलो प्लूटोनियम का प्रयोग किया गया था जो यूरेनियम से कही ज्यादा शक्तिशाली था।


नागासाकी पर गिराए जाने वाला बम पहले जापान के क्योटो शहर पर गिराने का भी प्लान बनाया गया था। लेकिन युद्ध के सेक्रेट्री हेनरी स्टिमसन ने इसे बदलवा दिया क्यूंकि उन्होंने अपनी पत्नी के साथ यहाँ पर हनीमून मनाया था और उनकी कई यादें इस शहर से जुडी हुई थी।

बम गिरने की वजह से हिरोशिमा और नागासाकी के करीब 2,46,000 लोग मारे गए थे। लगभग 1 लाख लोग तो बम गिरते ही मारे गए थे और बाकी के अगले कुछ सालों में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से मर गए।

अमेरिका ने आज तक परमाणु हमलों के लिए जापान से माफी नही मांगी। बराक ओबामा पहले ऐसे अमेरिकी राष्ट्रपति है जिसने हमले के 71 साल बाद हिरोशिमा की यात्रा की थी।