BSP विधायक का दावा: BJP ने दिया मंत्री पद और 50-60 करोड़ रुपये का ऑफर, कमलनाथ सरकार से समर्थन वापस लेने के लिए कहा

लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश में उनकी पार्टी की हार के लिए पथरिया विधानसभा क्षेत्र से विधायक रामबाई ने ईवीएम पर सवाल उठाए हैं.

भोपाल: 

बहुजन समाज पार्टी (BSP) की विधायक रामबाई ने सोमवार को दावा किया कि कांग्रेस नेतृत्व वाली कमलनाथ सरकार से समर्थन वापस लेने कि लिए भाजपा (BJP) ने उन्हें मंत्री पद और करोड़ों रुपये का ऑफर दिया है. हालांकि, न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए बताया कि उन्होंने ऑफर ठुकरा दिया. उन्होंने दावा किया, ‘हां, वो मुझे कॉल करते रहते हैं और कहते हैं कि बाकियों को जो ऑफर दिया गया है, वह आपको भी मिल जाएगा. उन्होंने मुझे बताया कि आपको मंत्री पद और 50-60 करोड़ रुपये मिल जाएंगे. यह गलत अटकलें हैं कि विधायक टूट रहे हैं.’ 
कांग्रेस सरकार को कोई खतरा नहीं बताते हुए उन्होंने कहा, ‘वे (भाजपा नेता) हर किसी को रुपये का ऑफर दे रहे हैं, लेकिन जो भी उसे कबूल करेगा वह मूर्ख होगा. पैसा ही जीवन में सब कुछ नहीं है, हमें गलत और सही देखना होगा और सच यह है कि भाजपा गलत है. मेरे लिए मंत्री पद और पैसा कोई अहमियत नहीं रखता. कमलनाथ सरकार रहे यह अहम है.’
लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश में उनकी पार्टी की हार के लिए पथरिया विधानसभा क्षेत्र से विधायक रामबाई ने ईवीएम पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा, ‘यह सब ईवीएम की गड़बड़ है. राजनीति में आने के बाद मैंने महसूस किया कि यह बहुत खराब चीज है.’ इसके साथ ही उन्होंने योग गुरु रामदेव के उस बयान का भी समर्थन किया कि देश की आबादी रोकने के लिए परिवार के तीसरे बच्चे से वोट करने का अधिकारी छीन लेना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘मैं उनके बयान से सहमत हूं. ना केवल वोट का अधिकार, बल्कि सबी तरह की सरकारी सुविधाएं छीन लेनी चाहिए.’ गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में बसपा कांग्रेस के साथ गठबंधन में है. प्रदेश में रामबाई सहित बसपा के दो विधायक हैं और उन्होंने कमलनाथ सरकार को समर्थन दे रखा है. 
मध्य प्रदेश की 29 में से 28 लोकसभा सीटों पर भाजपा ने सीटें हासिल की है. कांग्रेस के केवल छिंदवाड़ा सीट से नकुल नाथ ही जीत हासिल कर पाए थे. कमलनाथ सरकार को उस वक्त कुछ राहत मिली, जब उसे समर्थन देने वाले सारे विधायकों ने रविवार को विधायक दल की बैठक में शिरकत की. लोकसभा में बीजेपी को मिले प्रचंड बहुमत के बाद से ही इस तरह की चर्चा है कि राज्य में किसी भी वक्त कांग्रेस की सरकार गिर सकती है. ऐसे में सभी विधायकों के बैठक में शामिल होने के बाद फिलहाल मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर तो कोई खतरा नहीं समझ आता लेकिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष में बदलाव की बात जरूर उठ रही है.
कमलनाथ पहले ही प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की पेशकश कर चुके हैं. प्रदेश अध्यक्ष के बदले जाने के सवाल पर कमलनाथ सरकार में मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि यह मांग सिंधिया खेमे की नहीं है, यह मांग राज्य के हर कार्यकर्ता की है.