ऐतिहासिक बहुमत मिलने के बाद बीजेपी मुख्यालय में लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ये देश के किसानों की भी जीत है. पीएम मोदी को देश के किसानों को श्रेय देना भी चाहिए था, क्योंकि एनडीए को जो देशभर में 41 फीसदी से ज्यादा वोट मिले उसमें बड़ा योगदान किसानों का है. पीएम मोदी का ये धन्यवाद ग्रामीण जनता और किसानों तक तभी सार्थकता के साथ पहुंचेगा जब तुरंत ऐसे 10 कदम उठाए जाएं.
1.सूखा: भारत की तत्कालिक समस्या सूखा है. 22 मई तक भारत में प्री मॉनसून में भी 23 फीसदी बारिश कम हुई, इस बार मानसून भी देरी से आ रहा है. बारिश नहीं लाई जा सकती, लेकिन महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात समेत कई इलाकों में बूंद-बूंद पानी को तरसते लोगों और पशुओं के लिए पर्याप्त पानी का इंतजाम होना चाहिए.
2.गेहूं खरीद: इन दिनों देश के कई राज्यों में गेहूं, सरसों समेत कई फसलों की खरीद हो रही है. सरकारें सुनिश्चित करें कि किसानों की फसलों की सरकार द्वारा शत-प्रतिशत खरीद हो. यूपी समेत कई राज्यों में सरकारी गेहूं खरीद का बुरा बेहाल है. ये जरुरी है कि शत प्रतिशत किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ मिले. फोटो- गांव कनेक्शन
3.न्यूनतम समर्थन मूल्य : मान लिया कि सरकार तत्कालिक रुप में न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं बढ़ा सकती, लेकिन जिन फसलों की एमएसपी तय है उन पर खरीद कर किसानों के वोट के कर्ज़ का एक भाग चुकाया जा सकता है. साथ उन फसलों को भी एमएसपी के दायरे में लाया जाए जो बड़े भाग के किसान उगाते हैं. जैसे बिहार में बड़े पैमाने पर मक्का होता है लेकिन उन्हें एमएसपी नहीं मिलती. पंजाब का किसान आलू के भाव से परेशान है.
4.फसल पैटर्न में बदलाव (क्राप रोटेशन) : भारत के कई इलाकों में ऐसी फसलें हो रही हैं जो इन इलाकों में भूजल संकट और बढ़ा सकती हैं. महाराष्ट्र व यूपी में केला और गन्ना, पश्चिमी यूपी में गन्ना, हरियाणा व पंजाब में धान, मध्य यूपी में मेंथा, बुंदेलखंड में पान (नगण्य) जैसी फसलों में बहुत पानी खर्च हो रहा है. सरकार को चाहिए फसल का पैटर्न बदलने के प्रयास करे. किसानों को ऐसी खेती के विकल्प बताएं जाएं साथ ही जहां ये फसल नुकसान दायक हो रही है वहां इसपे रोक लगाकर दूसरी फसल को उगाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करना होगा.
5.मनरेगा और तालाब: ताल तलैयों के देश भारत में तालाब कभी पानी संरक्षण का बड़ा जरिया हुआ करते थे. अब ज्यादातर गाँवों के तालाब सूखे और कचरा घर बन गए हैं. तालाबों को बर्बाद करने में मनरेगा का बहुत बड़ा योगदान है. सरकार को चाहिए तालाबों की इंजीनियरिंग में तुरंत सुधार करवाए, क्योंकि लाखों रुपए लगाकर बनाए जाने वाले तालाबों में बारिश का पानी जमा ही नहीं हो पा रहा.
6.जैविक बाजार: पिछले कई वर्षों से भारत में जैविक का शोर बढ़ा है ये अच्छा है लेकिन ऑरगैनिक उत्पादों के लिए बाजार की उपलब्धता नहीं के बराबर है. जो किसान अपने उत्पाद बेच रहे वो उनकी मेहनत है. बाकी मार्केट पर कंपनियों का कब्जा है. सरकार को तत्काल किसानों की उपज की बिक्री का प्रबंध करना होगा वर्ना ये किसान भी रासायनिक उर्वरक और जहरीले कीटनाशकों की तरफ लौट जाएंगे.
7.अवारा पशु : किसानों ने भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट दिया है लेकिन छुट्टा पशु उनके लिए सिरदर्द बने हैं. किसान, फसल और गाय तीनों संकट में हैं. गोशाला (गोवंश आश्रय स्थल) ही सिर्फ समाधान नहीं हैं. यूपी इसका उदाहरण है. छुट्टा गोवंश में रोजगार के अवसर तलाए जाएं, साड़ों का बधियाकरण हो और सेरोग्रेसी आदि पर युद्धस्तर पर काम हों, वर्ना देर जो जाएगी.
8.फल सब्जी बाजार : फल और सब्जियों की खेती से अच्छा मुनाफा हो सकता है, लेकिन ये तभी संभव है जब मंडी किसान की पहुंच में हो. जो फसल ज्यादा पैदा हो रही हो वहां उसकी मंडी हो. ब्लॉक स्तर पर छोटे कोल्ड स्टोरेज बनाए जाएं.
9.प्रसंस्करण : किसान का गेहूं 16 से 18 रुपए किलो बिकता है लेकिन आटा 24 से 40 रुपए किलो तब बिकता है. ये सबको पता है कि प्रसंस्कण में फायदा है, लेकिन ये फायदा किसान को तब मिलेगा जब छोटा-मंझोला किसान भी उद्दमी बन जाए. लेकिन इसके लिए जरुरी है न ग्राम पंचायत तो ब्लॉक स्तर पर ऐसी यूनिट लगाई जाएं. सहकारिता के आधार पर ये काम सफल हो सकता है. यूनिट सरकार लगवाए, देखभाल समिति करे और किसान उसके मुताबिक पैसे देकर अपने उत्पाद बनवाए.
10.ग्राम पंचायतों पर निगरानी : चौदहवां वित्त आयोग लागू होने के बाद ग्राम पंचायतों को करोड़ों रुपए मिलते हैं. अगर ये सारा पैसा वाजिब तरीके से खर्च हो तो गाँवों की सूरत बदल सकती है. कई पंचायतों ने ऐसे सराहनीय काम किए भी हैं लेकिन ज्यादतर में प्रधान और स्थानीय अधिकारियों की मनमर्जी जारी है. ऐसे में निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था को और बेहतर करने की जरुरत है