जो सरकारी है, हमारा है, हम उसके मालिक व रखवाले भी…की भावना से करेेंं काम: मोदी

नई दिल्ली। योग हो, रामायण सर्किट, बुद्ध सर्किट हो ये सब देश की महान विरासत है। अयोध्या में दिवाली मनाने से किसने रोका था भाई? सिर्फ नागा साधुओं के झुंड वाले कुंभ के परसेप्शन को योगी जी की सरकार ने बदला है। कमियां हमारे अंदर भी होंगी लेकिन हमारे इरादे नेक हैं, पीएम मोदी ने आज वाराणसी से न केवल भाजपा कार्यकर्ता, पदधिकारी, सांसदों को संदेश दिया बल्‍कि पूरे देश को महान देश बनाने की ओर बढ़ने का आग्रह किया।

लोकसभा चुनाव में महाविजय के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज वाराणसी में भाजपा के कार्यकर्ता, पदाधिकारियों और जनता को संबोधित किया। पीएम मोदी ने दीनदयाल हस्तकला संकुल में मौजूद बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज देश के राजनीतिक कैनवास पर ईमानदारी से रग-रग में लोकतंत्र को जीने वाला कोई दल है, तो वो बीजेपी है। हम शासन में आते है तब भी लोकतंत्र की सबसे ज्यादा परवाह करते हैं।
जैसे दो शक्ति हैं नीति और रीति, जैसे दो शक्ति हैं नीति और रणनीति, जैसे दो शक्ति हैं पारदर्शिता और परिश्रम, जैसे दो शक्ति हैं वर्क एंड वर्कर, वैसे ही दो संकट भी हमने झेले हैं और वो दो संकट हैं- राजनीतिक हिंसा और राजनीतिक अस्पृश्यता।
पश्चिम बंगाल, केरल, त्रिपुरा और कश्मीर में हमारे कार्यकर्ताओं की राजनीतिक हत्याएं हुईं। इन जगहों पर एक तरह से हिंसा को मान्यता दे दी गई। देश में राजनीतिक छुआछूत बढ़ती जा रही है। आज भी बीजेपी को अछूत समझा जाता हैः पीएम मोदी
पारदर्शिता और परिश्रम दो ऐसी चीजें हैं, हर परसेप्शन को परास्त करने का साहस रखते हैं। आज हिंदुस्तान ने ये कर के दिखाया है। पारदर्शिता और परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है।
कार्य और कार्यकर्ता के मिलने से बड़ा करिश्मा हो सकता हैः पीएम मोदी
सरकार और संगठन के बीच तालमेल, परफेक्ट सिनर्जी, यह बहुत बड़ी ताकत रखती है। आप सबने इसको साकार किया हैः पीएम मोदी
मैं काशी के संगठन से जुड़े लोगों का, हर कार्यकर्ता का और हर समर्थक का इस बात के लिए आभार करता हूं कि उन्होंने इस चुनाव को जय-पराजय के तराजू से नहीं तोला। उन्होंने चुनाव को लोक संपर्क, लोक संग्रह, लोक समर्पण का पर्व माना।

राजनीतिक पंडित हमें अभी भी हिन्दी पट्टी की पार्टी के रूप में देखते हैं। नॉर्थ ईस्ट में हम सरकार चला रहे हैं। कर्नाटक में हम सबसे बड़े दल के रूप में मौजूद हैं। लद्दाख से हमारे सांसद चुनकर आते हैं लेकिन राजनीतिक पंडितों के लिए हम हिन्दी पट्टी की पार्टी हैं।

वाराणसी से ही उन्‍होंने देशवासियों को भी ”सरकारी” शब्‍द को लेकर संदेश दिया कि देश की हर नगरिक के भीतर ये भावना होनी चाहिए कि यह देश मेरा है। अपना स्कूटर तो हम इतना बढ़िया हम दिन में चार बार साफ करते है। 20 साल पुराना हो, कलर उखड़ गया हो फिर भी बराबर घिसकर चमक-चमक कर निकलते हैं। लेकिन सरकारी बस में बैठें और बगल में सीट खाली हो। बात करने वाला कोई नहीं है और नींद नहीं आ रही हो। तो हम करते क्या हैं? सीट पर ऊंगली डालते हैं। यहां सबने किया होगा और अंदर दो तीन इंच का जब तक गड्ढा नहीं किया हमको चैन नहीं आता है। भारत माता की जय बोले और फिर बनारसी पान खाकर…। यह कौन से भारत माता की जय है? उसी मां को गंदा करें, जिस मां का जयकारा करने के लिए हम संकट झेलते हैं। कहने का मतलब यह है कि भावना यह होनी चाहिए कि यह देश मेरा है।

इस देश का नागिरक अपने कर्तव्यों का पालन करे तो किसी के अधिकारों का हनन होने वाला नहीं है। आज भई इस देश में मानसिकता बन गई, आजादी का आंदोलन चला तो हम मर मिटते थे। आजाद होने के बाद हम कहने लगे कि यह सरकारी स्कूल है, वह सरकारी अस्पताल है। वह सरकारी नहीं, वह तेरा है। तुम उसके मालिक हो। जो भी सरकारी है वह भारत के हर नागरिक का है, हर नागरिक उसका मालिक है। एक नागरिक के नाते यह हमारा कर्तव्य है। यह सरकारी स्कूल है भई छोड़ो वहां कौन जाएगा, वह सरकारी अस्पताल है, वहां कौन जाएगा? ये सब सोचने के बजाय हम इसे ताकत कैसे दें, यह सोचने की जरूरत है।

बस की सीट फाड़ने वालों और पान की पीक थूकने वालों पर चुटकी लेते हुए पीएम मोदी ने कहा- कुछ लोग पान की पीक थूककर बोलते हैं भारत माता की जय। ऐसे कैसे भारत माता की जय होगी? जो भी चीज सरकारी है वह देश की हर व्यक्ति का है।

-एजेंसी

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