गोस्वामी तुलसीदास जी के इस प्रसंग के बारे में एक जरूर जाने, फिर देखिये कमाल

नमस्कार दोस्तों, गोस्वामी तुलसीदास जी के इस प्रसंग के बारे में एक जरूर जाने, फिर देखिये कमाल…गोस्वामी तुलसीदास के बारे में तो सब जानते ही हैं कि, उन्होंने अपने जीवन काल में बहुत से ग्रंथों की रचना की, जिसमें श्रीरामचरितमानस, हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक, हनुमान बाहुक, विनयपत्रिका, दोहावली, वैराग्य सन्दीपनी, जानकी मंगल, पार्वती मंगल, कवितावली आदि शामिल हैं। इतना ही नहीं वे संस्कृत के विद्वान और हिंदी के सर्वश्रेष्ठ कवि माने जाते हैं। लेकिन क्या किसी को इस बात का पता है कि तुलसीदास जी शादीशुदा थे और वे अपनी पत्नी रत्नावली से बेहद प्रेम करते थे ? लेकिन फिर ऐसा क्या हुआ कि वह अपना घर-परिवार छोड़कर राम भक्ति में लग गए। आइए जानते हैं इस बारे में-

तुलसीदास अपनी पत्नी रत्नावली से बहुत प्रेम करते थे। एक बार रत्नावली अपने मायके रहने के लिए गई थी। किंतु तुलसीदास अपनी पत्नी के बिना रह नहीं पा रहे थे और वह उसी रात भरी बारिश में पत्नी से मिलने उसके मायके की ओर निकल पड़े। रत्नावली का घर नदी के उस पार दूसरे गांव में था। जब वह नदी के किनारे पहुंचे तो देखा कि नदी के पास कोई नाव नहीं थी, तब उनको वहां किनारे पर एक बहती लाश दिखाई दी। तुलसीदास ने उस लाश पर बैठकर जैसे-तैसे नदी पार की।

पत्नी के घर पर पहुंचकर दरवाजा खटखटाया, लेकिन दरवाजा नहीं खुला। क्योंकि पत्नी दूसरी मंजिल पर सोती थी, इसलिए घर के पीछे जाकर ऊपर चढ़ने का रास्ता देखने लगे। घर के पीछे उनको एक मोटी रस्सी दिखाई दी, वो उस रस्सी से चढ़कर ऊपर आ गए और सीधा पत्नी के कमरे में पहुंचे। पत्नी हड़बड़ा गई और बोली इतनी रात बारिश में और वो भी ऊपर- आप कैसे आए! तुलसीदास बोले- रस्सी पकड़कर। पत्नी ने देखा रस्सी नहीं, सांप था।

पति की इस अथाह आसक्ति को देखकर पत्नी बोली- हे नाथ! मेरी देह से जितना प्रेम करते हो, इतना प्रेम यदि राम से करते, तो आपका जीवन धन्य हो जाता। पत्नी की ये बात तुलसीदास के हृदय में उतर गई और उसी समय तुलसीदास वहां से निकल गए और चित्रकूट नामक स्थान में एक कुटिया बनाकर रहने लगे, जिसके बाद तुलसीदासजी को भगवान राम और हनुमानजी का साक्षात्कार हुआ और भक्तिभाव में तुलसीदासजी ने अनेकों ग्रंथ की रचना की।