Schizophrenia मानसिक रोग है, अभिशाप नहीं: डॉ. विनय श्रीवास्तव

मथुरा। केडी मेडिकल कॉलेज, हास्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर के मानसिक रोग विभाग ने आज World Schizophrenia Day मनाया। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष डॉ. विनय श्रीवास्तव ने मानसिक रोगियों, उनके अभिभावकों और मेडिकल छात्र-छात्राओं को बताया कि Schizophrenia अभिशाप नहीं बल्कि एक मानसिक रोग है जिसका उपचार द्वारा निदान किया जा सकता है।

डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि इस समय विश्व की लगभग एक प्रतिशत आबादी इस रोग से पीड़ित है। यह रोग 15 से 45 वर्ष की उम्र के लोगों में अधिक होता है। शुरुआत में रोगी गुमसुम अकेला सा रहता है, धीरे-धीरे उसके कानों में आवाजें सुनाई देती हैं या कोई वस्तु दिखाई देने लगती है जबकि वास्तव में कोई वस्तु होती ही नहीं है। अनावश्यक शक-बहम, असामान्य व उग्र व्यवहार आदि इस बीमारी के लक्षण होते हैं। आज के समय में स्किजोफ्रेनिया के इलाज की नवीनतम विधियां व दवाइयां उपलब्ध हैं। अतः बीमारी के शुरुआती लक्षणों को पहचान कर इलाज करवाया जाए तो महज आठ से 10 माह में ही रोगी ठीक हो जाता है। मनोचिकित्सक गौरव सिंह ने बताया कि इस बीमारी का कारण आनुवांशिक, तनाव, पारिवारिक झगड़े व नशे की लत भी हो सकती है। स्किजोफ्रेनिया से पीड़ित व्यक्ति को स्थायी तौर पर उपचार की आवश्यकता होती है। यहां तक कि जब लक्षण गायब हो जाएं और रोगी को लगने लगे कि वह अच्छा हो गया है तभी उसे चिकित्सक के परामर्श के बाद दवा बंद करनी चाहिए। डॉ. गौरव सिंह ने कहा कि बीमारी के तथ्यों, गम्भीरता और लक्षणों के आधार पर इसके इलाज के तौर-तरीकों में अंतर हो सकता है।

डॉ. श्वेता चौहान ने बताया कि स्किजोफ्रेनिया मानसिक बीमारी का गंभीर रूप है, जिसके शिकार देश की शहरी आबादी में प्रति हजार लोगों में लगभग 10 लोग हैं। हमारे देश में स्किजोफ्रेनिया के करीब 90 प्रतिशत लोगों का इलाज ही नहीं हो पाता है। डॉ. श्वेता ने कहा कि स्किजोफ्रेनिया से पीड़ित मरीज की बातों को ध्यान से सुनने के साथ उससे शालीन व्यवहार किया जाना जरूरी है। कार्यक्रम में डॉ. नाहिद और मेडिकल छात्र-छात्राओं दिव्या चड्ढा, भूपेन्दर सिंह, तस्लीमा, शिवानी, शिवांष आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए। छात्र-छात्राओं ने पोस्टरों के माध्यम से भी स्किजोफ्रेनिया के लक्षण और उपचार के तरीकों से उपस्थित लोगों को अवगत कराया। इस अवसर पर मुंशीराम शर्मा ने अपने बेटे, सविता ने अपने भाई, सुशीला कुमारी ने अपनी बेटी तथा हरीशंकर ने अपने साले की मनोदशा बताते हुए के.डी. मेडिकल कालेज, हास्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर के मानसिक रोग विभाग के चिकित्सकों की तारीफ की और कहा कि यहां के समुचित उपचार तथा परामर्श से ही आज उनके परिजन स्वस्थ हो सके हैं। कार्यक्रम के आयोजन में शिवराज सिंह राणा का विशेष योगदान रहा।

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