नरेंद्र मोदी एक बार फिर पीएम बनने जा रहे हैं. बीजेपी और मोदी की इस जीत को देखने के कई मानक हो सकते हैं. इस चुनाव में पीएम मोदी सिर्फ बनारस से नहीं, बल्कि हर उस सीट से लड़ रहे थे, जहां से बीजेपी या एनडीए ने कैंडिडेट खड़े किए थे. राष्ट्रवाद, आतंकवाद और हिन्दुत्व के मुद्दे पर लड़े गए इस चुनाव में विकास का घोल भी घुला था. पीएम मोदी की कई योजनाओं का लाभ गरीबों को मिला. कहीं न कहीं मोदी की जीत में इन योजनाओं की भी भूमिका है. चाहे वो बिजली हो, शौचालय हो, आवास हो या गैस. या फिर चाहे किसान निधि की ही बात क्यों न हो. ऐसी 5 बातों पर नजर डालते हैं जिसने एक बार फिर मोदी सरकार को चुनने में मदद की.

#बिजली

25 सितंबर 2017. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘सौभाग्य’ की शुरुआत की थी. यानी उन लोगों के घरों में बिजली पहुंचाने की शुरुआत जहां बिजली नहीं पहुंची थी. इस मौके पर पीएम ने कहा था कि
”स्वतंत्रता के 70 बरस बाद भी देश में 4 करोड़ से ज्यादा घर ऐसे हैं जिसमें बिजली कनेक्शन नहीं हैं. यह दुखद है कि आज तक देश में 4 करोड़ परिवारों में बल्ब तो दूर, बिजली तक नहीं पहुंच पाई है.
लल्लनटॉप ने इस योजना की जमीनी हकीकत पता की थी.  सरकार का दावा है कि कुल 21,44,73,043 घरों को बिजली कनेक्शन दिया जा चुका है. इस योजना के तहत सरकार ने सितंबर 2017 से अप्रैल 2019 तक 2,62,84,350 घरों में बिजली पहुंचाई है. अब देश के सिर्फ 18,734 घरों में बिजली पहुंचनी बाकी है. 99.99 फीसदी घरों में बिजली पहुंच चुकी है. मोदी सरकार ने इसे अपनी बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश किया.  चुनावों में पार्टी को इसका फायदा भी मिला.

# शौचालय

एनडीए 2014 की तरह अगर एक बार फिर सत्ता में वापसी कर रही है तो इसके पीछे ‘स्वच्छ भारत मिशन’ का भी बड़ा योगदान है. इस योजना के तहत गांवों में भारी मात्रा में शौचालयों का निर्माण किया गया. 2 अक्टूबर, 2014. नरेंद्र मोदी ने राजपथ से स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत की थी. इसके तहत भारत को अक्टूबर 2019 तक खुले में शौच से मुक्त करना था. मोदी ने इस अभियान को जनआंदोलन में तब्दील करने की बात कही थी. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर 2014 से अब तक देश में 9,24,33,198 शौचालय बनाए जा चुके हैं. 5,55,405 गांव, 616 जिले और 30 राज्य खुले में शौच मुक्त हो चुके हैं. अब तक देश का 98.90 फीसदी क्षेत्रफल खुले में शौच मुक्त घोषित किया जा चुका है.

#आवास

रोटी, कपड़ा और मकान. किसी भी व्यक्ति की बुनियादी जरूरत होती है. पीएम मोदी ने लोगों को घर देने के लिए ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ शुरू की थी. 2016 में नरेंद्र मोदी सरकार ने इंदिरा आवास योजना को नए सिरे से शुरू किया. इसे नाम दिया गया, ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’. इसके तहत 2022 तक कुल 3 करोड़ आवास बनाने का लक्ष्य रखा गया. इंदिरा आवास के तहत मैदानी इलाकों में घर बनाने के लिए 70,000 रुपए और दुर्गम इलाकों में 75,000 रुपए के सरकारी अनुदान की व्यवस्था थी. हर जगह की जरूरतों के हिसाब से घर के 100 नक्शे तैयार किए गए. अगर कोई लाभार्थी और बेहतर घर बनवाना चाहे तो कम ब्याज पर 70,000 रुपए तक के लोन की व्यवस्था भी की गई थी. हालांकि यह सच है कि सब लोगों के घर नहीं बने हैं, लेकिन लोगों को उम्मीद है कि पीएम मोदी ने जो वादा किया है उसे जरूर निभाएंगे. इसी उम्मीद में उन्होंने एक बार फिर मोदी को सत्ता सौंप दी है.

#गैस

मोदी सरकार की 10 बड़ी योजनाओं में से एक ‘उज्ज्वला’ योजना. 1 मई, 2016 को उत्तर प्रदेश के बलिया में प्रधानमंत्री मोदी ने ये स्कीम लॉन्च की थी. शुरुआत में उज्ज्वला योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे के (यानी BPL परिवारों को) पांच करोड़ परिवारों को LPG कनेक्शन बांटे जाने की बात कही गई. बाद में सरकार ने इसका दायरा बढ़ाया. सरकार का दावा है कि अब तक सात करोड़ से ज्यादा उज्ज्वला कनेक्शन बांट दिए गए हैं. देश के अधिकांश हिस्सों में एलपीजी कनेक्शन बांटे जा चुके हैं.
कहावत है – हाथी तो ले आए, लेकिन उसको खिलाओगे कैसे? भले ही अधिकांश परिवारों के घर में गैस सिलिंडर पहुंच चुका है, लेकिन उज्ज्वला के तहत मिला गैस कनेक्शन वैसा ही हाथी है. मिल तो गया, लेकिन उसको रिफिल करवाना लोगों की जेब को भारी पड़ रहा है. लेकिन लोगों को उम्मीद है कि इसका भी समाधान निकलेगा.

गैस सिलेंडर के इस्तेमाल से बचते दिखे लोग (फोटो: दी लल्लनटॉप)

#किसान निधि

राहुल गांधी ने चुनावों में वादा किया था कि कांग्रेस अगर जीत हासिल करती है तो वह गरीबों को हर साल 72 हजार रुपए यानी हर महीने 6 हजार देगी. राहुल के इस वादे पर लोगों ने भरोसा नहीं किया. चुनावों से ठीक पहले पीएम मोदी ने किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत की थी. इस योजना के तहत देश के 12 करोड़ किसानों के खाते में सलाना 6 हजार रुपए देने की बात कही गई थी. तीन किस्तों में पैसा किसानों के खाते में डाला जाना था. पहली किस्त की शुरुआत पीएम नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश से की थी. योजना एक दिसंबर, 2018 से प्रभावी है. इस योजना का मकसद खेती के लिए बीज, उर्वरक, कृषि उपकरण, श्रम व अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए किसानों को 6 हजार रुपए सलाना देना है. चालू वित्त वर्ष के लिए इस कार्यक्रम के तहत 20,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है. किसानों को बीजेपी के पाले में करने के लिए लाई गई इस योजना का लाभ बीजेपी को मिला.