आडवाणी के लिए नरेंद्र मोदी का है ख़ास प्लान-लालकृष्ण आडवाणी जो कुछ समय पहले तक देश के राष्ट्रपति बन सकते थे लेकिन आडवाणी के गुरु नरेंद्र मोदी ने गुरु को दक्षिणा देने से साफ़ मना कर दिया है. आडवाणी जी से उप राष्ट्रपति के पद के लिए एक बार पूछा ज़रूर गया था लेकिन इस पद के लिए लाल जी ख़ुद राज़ी नहीं हुए थे. अब ऐसे में आडवाणी जी के साथ मीडिया और दर्शक काफ़ी ग़लत व्यवहार कर रहे हैं. आप अगर नहीं जानते हैं तो आपको बता दें कि लालकृष्ण आडवाणी किसी भी पद की इच्छा अब नहीं रखते हैं.
इनका बस एक सपना था और वही आज भी है कि पार्टी के लिए आजीवन काम करते हैं. आज यह नेता महाभारत के भीष्म पितामह की तरह बस अपने हस्तिनापुर की सेवा बिना किसी स्वार्थ के कर रहा है. कई जगह से इस तरह की ख़बरें आ रही हैं कि आडवाणी अब शायद एक ऐसे नेता हो गये हैं जिनसे कोई बात नहीं करना चाहता है. जब तब सभी को उम्मीद थी कि वह राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बन सकते हैं तब तक तो सभी इनको घेरे रहते थे लेकिन आज लालकृष्ण आडवाणी के पास मिलने वालों की संख्या में कमी आ गयी है. लेकिन आपको बता दें की मोदी अपने गुरु को अभी भी एक तोहफ़ा दे सकते हैं. आडवाणी के लिए नरेंद्र मोदी का है ख़ास प्लान

सांसद लालकृष्ण आडवाणी सालों से राष्ट्रीय राजनीति से सक्रिय नहीं हैं. साथ ही साथ अगर आडवाणी सांसद पद से इस्तीफ़ा दे देते हैं और किसी राज्य का राज्यपाल बनने के लिए रज़ाई हो जाते हैं तब मोदी अपने गुरु को जल्द ही किसी राज्य का राज्यपाल बना सकते हैं. वैसे भी राज्यपाल का राज्य में वही पद होता है जो केंद्र में राष्ट्रपति का होता है. रिटायरमेंट से पहले अगर मोदी गुरु को राज्यपाल भी बना देते हैं तो यह एक तरह से गुरु दक्षिणा ही मानी जाएगी. बिहार राज्य को जल्द ही राज्यपाल चाहिए होगा लेकिन शायद बिहार के साथ मुश्किल यह है कि वह लालकृष्ण आडवाणी को शायद मंदिर-मस्जिद विवाद के चलते स्वीकार ना करे.

अब राष्ट्रपति चुनाव से पहले बाबरी मस्जिद केस में आडवाणी का नाम बारबार नहीं उछलता तो एक बार को आडवाणी के नाम पर चर्चा हो सकती थी लेकिन अब गुरु आडवाणी को अगर किसी राज्य का राज्यपाल भी बनवा दिया जाए तो यह गुरु को सच्ची दक्षिणा समझी जाएगी.